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अंगारों पर चलकर मनाया मातम

Tue, 03 Oct 2017 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मऊ
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ताजिया जुलूस में शामिल लोग। 
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कर्बला के शहीदों की याद में सोमवार को 11वीं मुहर्रम के दिन मजलिसों व मातम का सिलसिला जारी रहा। यही नहीं सदर इमामबाड़ा फुलेलपुरा की सहन में कम्मा व जंजीरजनी के बाद सभी अजादार अंगारों पर चलकर मातम मनाया। इस मौके पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।          
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 इमाम जुम्मा शिया जामा मस्जिद मुहम्मद तकी ने बताया कि यजीद के गलत कारनामों के खिलाफ इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ कर्बला में जंग करते हुए शहादत देकर हमेशा के लिए यह बता दिया कि आतंकवाद जुल्म, अत्याचार, बर्बरता और लोगों को डराने वाला इस्लाम नहीं है और मुहम्मद साहब का लाया हुआ इस्लाम और है। जिसमें मुहब्बत, भाईचारा, मानवता और लोगों को इज्जत करना सिखाता है। यही वजह है कि चौदह सौ साल पहले शहीद होने वाले इमाम हुसैन और उनके साथियों के बलिदान अब भी नमूना के तौर पर समाज में जिंदा है। बताया कि यजीद इतना जालिम व तानाशाह था कि इमाम हुसैन उनके भाई बेटों, दोस्तों यहां तक की छह महीने के उनके मासूम बेटे जनाबे अली असगर को तीन दिन तक भूखा, प्यासा रख शहीद कर दिया। इस अत्याचार व जुल्म को लेकर शिया समुदाय आंसू बहाता है। उक्त शहादत को लेकर 11वीं मुहर्रम को कस्बे के फुलेलपुरा, इमामबाड़ा में कम्मा व जंजीर के साथ अंगारों पर चलकर मातम मनाया। इस दौरान अंजुमन इमामिया रजिस्टर, अंजुमन हैदरी, अंजुमन सज्जादिया, अंजुमन इमामिया कदी ने अपने अंदाज में नौहाख्वानी और सीनाजनी की। इस अवसर पर डॉ.मुंजीर मेहदी, हसनैन अली, जावेद हुसैन, करार अली, आबिद अली, वाकर रजा सीबू, अंसार अली, डा.कासिम मौजूद रहे।
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