सर्व शिक्षा अभियान पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने के बाद भी परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को लाभ मिलता नजर नहीं आ रहा है। 18 अक्तूबर से अर्द्धवार्षिक परीक्षा शुरू हो रही है, लेकिन अभी तक निदेशालय की ओर से शत-प्रतिशत नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण नहीं किया जा सका है। प्रत्येक कक्षाओं में एक-दो पाठ्यपुस्तकें वितरित कर इतिश्री कर दी गई है। जबकि अर्द्धवार्षिक परीक्षा में 1.22 लाख बच्चे शामिल होंगे। सरकार की ओर से प्रदान की जा रही गुणवत्तापरक शिक्षा पर सवाल उठने लगा है। बेसिक शिक्षा विभाग ने विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में परीक्षा का बजट भेजने का दावा किया है। लेकिन अधिकांश विद्यालयों के खाते में पहुंचा ही नहीं है।
जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। शिक्षा सत्र का छह माह बीत गया, लेकिन अभी तक बच्चों में नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण सुनिश्चित नहीं किया जा सका है। विभागीय लापरवाही की स्थिति यह है कि महत्वपूर्ण गणित, अंग्रेजी की पुस्तकों का अभाव है। अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता खाए जा रही है। परिषदीय विद्यालयों में वितरित की गई रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र में वितरित की गई पुस्तकों के आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो पहली कक्षा में एक पाठ्यपुस्तक के सापेक्ष एक पुस्तक वितरित कर दी गई है। इसी तरह दूसरी कक्षा में दो के सापेक्ष एक, तीसरी कक्षा में पांच के सापेक्ष एक, चौथी कक्षा में पांच के सापेक्ष एक, पांचवीं कक्षा में पांच के सापेक्ष एक भी पुस्तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। इसी छठवीं में 12 के सापेक्ष दो, सातवीं में 12 के सापेक्ष पांच तथा आठवीं में 12 के सापेक्ष पांच ही वितरित की जा सकी है। यह तो एक बानगी है। 18 अक्तूबर से अर्द्धवार्षिक परीक्षा होनी है। परीक्षा में 1.22 लाख बच्चे शामिल होंगे। परीक्षा शुरू होने में चंद दिन शेष हैं लेकिन विद्यालय प्रबंध समिति के खाते में परीक्षा का बजट नहीं आया है। जबकि विभागीय अधिकारियों ने बजट जारी करने का दावा किया है। शैक्षिक गुणवत्ता के मूल्यांकन में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा डायट प्राचार्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन पाठ्यपुस्तकों के वितरण के मामले में विस्तृत जानकारी देने को तैयार नहीं हैं। इस संबंध में पिपरीडीह क्षेत्र के अभिभावक श्रवण यादव, जयप्रकाश राम, भवानी प्रसाद, रामू प्रसाद का कहना है कि पुस्तकों के अभाव में बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। शिकायत करने पर आश्वासन ही मिलता है।