ीएम योगी आदित्यनाथ का फरमान पीडब्ल्यूडी विभाग के लिए भारी चुनौती पेश कर दिया है। विभाग की 289 किलोमीटर लंबी 265 ऐसी सड़कें हैं जो सामान्य मरम्मत की श्रेणी में हैं। इनकी मरम्मत के लिए 2386 लाख रुपयों की जरूरत होगी जबकि 279 किलोमीटर लंबी 179 ऐसी सड़कें चिह्नित हैं जिनमें पैच लगाए जाएंगे । इसके लिए 115 लाख रुपयों की आवश्यकता होगी। यानी कुल मिलाकर जिले की सड़कों की मरम्मत के लिए 25 करोड़ रुपयों की जरूरत होगी। यह धनराशि विभाग ने शासन से मांगी है।
जनपद की दो सड़कों को छोड़ दिया जाय तो सारी सड़कें बहुत खराब हैं। कभी जिले की सबसे अच्छी मानी जाने वाली शहीद रोड का तो काफी बुरा हाल है। वाराणसी से गोरखपुर हाइवे 29 का जनपद में पड़ने वाला 53 किलोमीटर का भाग भी बदहाल है। जिले की सड़कें बदहाली के जिस दौर में हैं उससे लगता नहीं कि सीएम की समय सीमा में ये गड्ढामुक्त हो पाएंगी। शहीद रोड जिसके जन्मदाता कल्पनाथ राय माने जाते हैं उनके गांव सेमरीजमालपुर में ही दो फुट गहरा गड्ढा है। यहां पर पूरे साल पानी लगा रहता है।
मुख्यमंत्री के फरमान के बाद हरकत में आए विभाग ने खराब सड़कों का सर्वे करा लिया है। गड्ढों वाली सड़कों का चिह़्नीकरण पीडब्ल्यूडी ने प्राथमिकता के आधार पर करा लिया है। इसके अलावा जिन सड़कों में केवल पैच से काम चल सकता है उनकी पहचान अलग से कराई गई है। कुल 265 ऐसी सड़कें हैं जिनकी सामान्य मरम्मत करानी पड़ेगी। इन पर 23 करोड़ 86 लाख रुपये खर्च होंगे।
इनकी लंबाई 289 किलोमीटर है। इसके आलावा 179 सड़कों पर बन गए गढ्ढों पर पैच से काम चल सकता है।इसके लिए एक करोड़ 15 लाख रुपये खर्च होंगे। इस प्रकार जिले में 568 किलोमीटर की लंबाई में मरमम्मत करनी होगी। जिले की 444 सड़कें ऐसी हैं जिन पर आवागमन सुचारु नहीं कहा जा सकता है। इस बाबत अधिशासी अभियंता बीके प्रसाद का कहना है कि निर्धारित अवधि में सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए तेजी से कार्य किए जा रहे हैं। सड़कों का चिह्नित कर लिया गया है।