दोहरीघाट। घाघरा का जलस्तर घटने के बाद भी नदी का उग्र रुप बरकरार रहने से तटवर्ती इलाके के लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। नदी के दो दिन स्थिर रहने के बाद सोमवार को जलस्तर में 20 सेमी का घटाव होने के बाद भारतमाता मंदिर के उत्तर रखा बोल्डर खिसक गया। इससे ऐतिहासिक धरोहरों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
नदी के जलस्तर में घटाव दर्ज होने के बाद प्रशासन राहत की सांस ले रहा है। वहीं नदी के उग्र होने से तटवर्ती इलाके के लोगों की नींद ही उड़ गई है। नदी के दो दिन स्थिर रहने के बाद घाघरा का जलस्तर तीसरे दिन 20 सेमी का घटाव दर्ज किया गया। जलस्तर घटने के साथ ही मुक्तिधाम पर स्थित भारतमाता मन्दिर के उत्तर रखा बोल्डर खिसक गया। बोल्डर खिसकने की घटना से कस्बा सहित तटवर्ती इलाके के लोगों की नींद ही उड़ गई है। कटान पीड़ितों का कहना है कि जब-जब नदी घटती बढ़ती है तब-तब कहर बरपाती है। इस संबंध में दोहरीघाट क्षेत्र के शिवकुमार यादव, मनोज वर्मा, श्रीकांत प्रसाद का कहना है कि प्रतिवर्ष नदी कहर बरपाती है, लेकिन बाढ़ समस्या का स्थाई समाधान की ठोस कार्ययोजना नहीं बनाई जा सकी है। कागज पर ही ऐतिहासिक धरोहरों तथा बाढ़ से बचाव के लिए योजनाएं बनाई जाती है। नदी के जलस्तर पर नजर डाला जाए तो सोमवार को 69.50 मी रहा। जबकि 15, 16 जुलाई को 69.70 मीटर रहा। गौरीशंकर घाट पर खतरे का निशान 69.90 मीटर आंका गया है।