नगर के मठिया टोला स्थित सरस्वती शिव मंदिर में नौ दिवसीय अधिमास महोत्सव मनाया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पार्थिव पूजन व रुद्राभिषेक किया गया।
रुद्राभिषेक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विभिन्न मोहल्लों से श्रद्धालुओं का रेला सुबह से ही लगा रहा। आचार्यों ने विधिविधान से रुद्राभिषेक संपन्न कराया। रुद्राभिषेक संपन्न होते ही श्रद्धालुओं के जयघोष से पंडाल गूंज उठा।
इस मौके पर आचार्य संतोष शास्त्री ने कहा कि भगवान शंकर कल्याणकारी हैं। उनकी पूजा समस्त मनोरथ पूरी करती है। हिंदू धर्मशास्त्रों के मुताबिक भगवान सदाशिव का विभिन्न प्रकार से पूजन अर्चन करने से विशिष्ट लाभ की प्राप्ति होती है। रुद्रार्चन और रुद्राभिषेक से हमारे पटक से पातक कर्म भी जलकर भष्म हो जाते हैं।
इससे साधक में शिवत्व का उदय होता है। साथ ही भगवान शिव का शुभाशीर्वाद प्राप्त होता है। रुद्राभिषेक की महत्ता को बताते हुए कहा कि रावण ने अपने दसों सिरों को काट कर उसके रक्त से शिवलिंग का अभिषेक किया था तथा सिरों को हवन की अग्नि को अर्पित कर दिया था।
जिससे वो त्रिलोकजयी हो गया। भष्मासुर ने शिव लिंग का अभिषेक अपनी आंखों के आंसुओं से किया तो वह भी भगवान के वरदान का पात्र बन गया। संगीतमय प्रवचन में देर शाम तक लोग गोते लगाते रहे।
उधर, बोझी बाजार के सिकटिया स्थित छोटी सरयू नदी तट पर स्थित संत दरबारी बाबा की कुटी पर चल रहे अखंड हरिकीर्तन में स्थानीय के साथ ही गैर जिलों के भक्त भी शामिल हो रहे हैं।
्रहरिकीर्तन में रामकृष्ण संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो गया है। संत दरबारी बाबा की कुटी पर गत 23 फरवरी से शुरू हुआ अखंड हरिकीर्तन सवा साल तक चलेगा। कुटी में स्थित संत दरबारी बाबा की समाधि पर मत्था टेकने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।
अनुष्ठान के संयोजक गौरीशंकर दास, पुजारी रामकेर सिंह ने बताया कि संत दरबारी हरिकीर्तन प्रेमी थे। उनके जीवनकाल में प्रत्येक रविवार को साप्ताहिकी हरिकीर्तन का आयोजन किया जाता था। उन्हीं की याद में हरिकीर्तन का आयोजन किया जाता है। संत दरबारी बाबा की समाधि पर मत्था टेकने से सभी मनोकामना पूरी होती है।