घोसी में मौजूद प्राचीन घरोहर सीताकुंड
तहसील मुख्यालय स्थित प्राचीन व धार्मिक महत्व वाला सीताकुंड और उसके सामने स्थित राम कुंड पोखरी पर अतिक्रमण हो चुका है। इसके चलते दोनों कुंड अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। पर्यटन विभाग की ओर से वर्ष 2011 में इसका सुंदरीकरण कराने तथा नगर पंचायत द्वारा घाटों का निर्माण के बाद भी इस की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। तहसील के सटे होने के बाद भी इस की दुर्दशा पर न तो अधिकरियों और न तो जनप्रतिनिधियों की नजर पड़ रही है। कुंड के पूर्वी किनारे पर स्थित मां सीता(शीतला) और मां काली का मंदिर भी बदहाल है।
मान्यता है की श्रीराम मां सीता से विवाह कर अयोध्या लौट रहे थे उसी समय दोनों लोगों ने राजा नहुष की नगरी में रात्रिविश्राम किया था। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग के पूर्वी किनारे स्थित पोखरे में मां सीता ने तथा पश्चिमी किनारे स्थित पोखरे में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण ने स्नान किया था, तब से यह पोखरा सीता कुंड के नाम से प्रसिद्ध हो गया। जनश्रुति के अनुसार यह स्थान बड़ा ही रमणीक था। तहसील के अभिलेख के अनुसार सीताकुंड छह एकड़ के क्षेत्रफल में तथा इसके सामने स्थित उत्तर रामकुंड एक एकड़ में था। यही हाल राष्ट्रीय राजमार्ग के पश्चिम स्थित रामकुंड तो मात्र 100 कड़ी में ही रह गया है। सीता कुंड पौराणिक महत्व के साथ लोगों के चर्म रोग के निवारण में भी सहायक है।
यहां पर हर रविवार और मंगलवार को चर्मरोग से पीड़ित लोग आकर सीता कुंड में स्नान करते हैं। कुंड का वर्ष 2011 में तत्कालीन चेयरमैन गायत्री जायसवाल के प्रयास से तत्कालीन राजस्वमंत्री फागू चौहान ने पर्यटन विभाग से प्रस्ताव पास करा कर इस के सुंदरीकरण के लिये 25 लाख स्वीकृत करा कर 24 अक्टूबर 2011 को इस का शिलान्यास कराने के साथ बाउंड्री के साथ पूरब तरफ पक्का घाट का निर्माण कराया। आज आधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते उपेक्षित पड़ा है।