मऊ। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में आने वाले मरीज अपने सकारात्मक से संक्रमण को हराने में सफल तो हो रहे हैं। लेकिन संक्रमण से ठीक होने के बाद भी कई तरह की समस्याएं देखी जा रही हैं। चिकित्सक भी मान रहे हैं कि संक्रमण से रिकवर होने के बाद लोगों में सांस लेने में तकलीफ, दिल की बीमारी, तंत्रिका तंत्र में समस्याएं सामने आ रही हैं। इस समस्या को देखते हुए जिला अस्पताल में पोस्ट कोविड अस्पताल शुरू किया गया है।
जिला अस्पताल के सीनियर फीजिशियन डॉ. जीएल केशरवानी ने बताया कि संक्रमण से ठीक हो चुके लोग रोज अलग-अलग समस्याएं लेकर आ रहे हैं। इनमें कमजोरी, थकान, सांस लेने में दिक्कत और डायरिया की समस्या के मामले अधिक हैं। बताया कि कई मरीजों में गुर्दे, फेफड़े में संक्रमण से नुमोनिया की समस्या आ रही है। बताया कि ऐसे मरीजों के रक्त में क्लॉट यानी खून के थक्के बन जाते हैं और मरीज की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आ जाती है। लेकिन रक्त में बने थक्के हार्ट अटैक या ब्रेन स्टोक का कारण बन सकते हैं। कोरोना से ठीक होने के बाद ऐसे कई मामले सामने भी आ चुके हैं।
वहीं फिजिशियन डॉ. शैलेष कुशवाहा ने बताया कि संक्रमण के दौरान आईसीयू से लौटे ज्यादातर लोगों को थकान व कमजोरी महसूस हो रही है। मानसिक बीमारी से ग्रसित होने की समस्या भी लोगों में देखने को मिल रही है। इस दौरान लोगों में घबराहट, व्यवहार में परिवर्तन, नींद न आना आदि शामिल है। वहीं जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बृजकुमार ने कहा कि वायरस का हमला सीधे फेफड़ों पर पड़ रहा है, इसलिए ठीक होने के बाद भी ज्यादातर मरीजों के फेफड़े पूरी तरह ठीक नहीं होते। फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी आ जाती है। सीएमएस ने बताया कि इस समस्या को देखते हुए जिला अस्पताल में पोस्ट कोविड अस्पताल शुरू किया गया है। जिसमें संक्रमण से ठीक हो चुके मरीज किसी तरह की समस्या आने पर अपना उपचार करा सकते है।
चिकित्सक से लें परामर्श
मऊ।जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जीएल केशरवानी ने बताया कि संक्रमण से रिकवर होने के बाद भी मरीज को जागरूक रहने की जरूरत है। खासतौर पर शुगर तथा अन्य गंभीर बीमारी वाले मरीजों को। किसी तरह की परेशानी होने पर लापरवाही नहीं बरतें। चिकित्सक से इस संबंध में सलाह लें। जिले में 18 मई तक 7 हजार 735 मरीज मिल चुके है। इसमें 7 हजार 230 मरीजों ने संक्रमण को हरा चुके है। वहीं 60 मरीजों की मौत हो चुकी है। वर्तमान में सक्रिय 445 मरीजों में से 316 मरीजों का उपचार होम आईसोलेशन में किया जा रहा है।