बता दें कि फर्जी असलहा मामला मऊ के दक्षिण टोला थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार तत्कालीन थानाध्यक्ष दक्षिण टोला निहार नंदन कुमार की तहरीर पर 5 जनवरी 2020 को आयुध अधिनियम और जालसाजी के मामले में रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें मुख्तार अंसारी सहित सात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
आरोप है कि मुख्तार अंसारी ने जिन लोगों के असलहा लाइसेंस के लिए जिलाधिकारी को अपने लेटर पैड पर पत्र लिखकर असलहा लाइसेंस जारी करने की सिफारिश की थी। इस सिफारिश पर जिलाधिकारी ने उन लोगों का लाइसेंस जारी भी कर दिया। बाद में जांच के बाद जिन लोगों के नाम असलहा लाइसेंस जारी किया गया था उनका नाम पता फर्जी पाया गया।
इस खुलासे के बाद मुख्तार अंसारी सहित सात लोगों के विरुद्ध दक्षिणटोला थाना में रिपोर्ट दर्ज हुई। पुलिस ने विवेचना के बाद मुख्तार अंसारी सहित सभी के विरुद्ध आरोप पत्र सीजेएम कोर्ट मे पेश किया। इस मामले में बुधवार को बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी की वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी हुई।
उधर गैगेंस्टर एक्ट के मामलों को एमपी/एमएलए कोर्ट मे स्थानांतरित किए जाने के मामले मे एडीजे दिनेश चौरसिया ने विशेष लोक अभियोजक और मुख्तार अंसारी के अधिवक्ता दारोगा सिंह के तर्कों को सुनने के बाद बांदा जेल से आख्या तलब करने का आदेश दिया। साथ ही मामले की सुनवाई के लिए 31 मई की तिथि तय की।