संगठन की जिलाध्यक्ष ने कहा कि भविष्य निधि, ग्रेड्युटी, किसी तरह की सामाजिक सुरक्षा, यहां तक की साप्ताहिक या वार्षिक अवकाश तथा एक दिन का भी मातृत्व अवकाश तक नहीं दिया जाता है।
उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन के तत्वाधान में गुरुवार को आशाओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन और नारेबाजी किया। दस सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सीटी मजिस्ट्रेट का सौंपा। चेताया कि यदि उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा तो आशा आंदोलन करने को बाध्य होंगी।
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यह है मामला
संगठन की जिलाध्यक्ष संतोषी तिवारी ने कहा कि पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन अपनी बुनियादी जरूरतों और समस्याओं को विभिन्न तरीकों से उठाकर समाधान की मांग कर रहा है। जबकि उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। कहा कि आशाओं पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है, जबकि उनको दिए जाने वाली प्रोत्साहन राशि का कोई भुगतान नहीं हो रहा है। अभी आशा से 50 से अधिक काम लिए जाते हैं, उनका कोई भुगतान उन्हे नहीं मिलता। जिन दो-चार कार्यों की प्रोत्साहन राशियां दी भी जाती हैं, उनका निर्धारण वर्षों पूर्व किया गया था।
कहा कि भविष्य निधि, ग्रेड्युटी, किसी तरह की सामाजिक सुरक्षा, यहां तक की साप्ताहिक या वार्षिक अवकाश तथा एक दिन का भी मातृत्व अवकाश तक नहीं दिया जाता है। अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन दिया जिसमें गोल्डेन आयुष्मान कार्ड व दस्तक वेलनेस सेंटर में योगदान, टीबी, कुष्ठ रोग निरोधक अभियान, पोलियो के विरुद्ध अभियान, हेल्थ प्रमोशन आदि समसामयिक कार्य में योगदान का भुगतान अविलंब किया जाए।
45वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिश के अनुरूप संगिनी और आशा कर्मियों को राज्य स्वास्थ्यकर्मी के रूप में मान्यता देकर उन्हें न्यूनतम वेतन, मातृत्व अवकाश, कार्यस्थलों में सुरक्षा की गारंटी प्रदान की जाए। वर्ष 2015 से अब तक सेवा के दौरान दुर्घटनाओं में और अन्य कारणों से जान गंवाने वाली आशा व आशा संगीनियों के आश्रितों को 20 लाख मुवावजा। मारपीट, उत्पीड़न पर रोक लगाने के लिए राज्य के सभी चिकित्सालयों को सर्कुलर जारी किया जाए। यौन हिंसा रोकने के लिए जिला स्तर पर जेंडर सेंसटाइजेशन कमेटी अगेंस्ट सेक्सुअल हैरेसमेंट (जीएस कैस) का गठन हो।
सभी आशा व आशा संगीनियों को 10 लाख रुपया का स्वास्थ्य बीमा व 50 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर दिया जाए। प्रदेश भर में भुगतान के नाम पर सीएचसी व पीएचसी प्रभारियों, बीसीपीएम सहित अन्य कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली वार्षिक एक हजार करोड़ से अधिक की घूसखोरी को राकने के लिए एक निगरानी तंत्र बनाया जाए। साक्ष्यों के साथ दी जाने वाली शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए स्वतंत्र प्रकोष्ठ गठित किया जाय। ज्ञापन देने वालों में लीलावती देवी, माधुरी मौर्या, फूलमती देवी, चिंता देवी, शशिकला यादव, संगीता देवी, शीला देवी सहित सैकड़ों आशा थी।