पिता हनुमान कनौजिया, बोले, भाई मनोज की मौत का बदला लेने के 16 साल की उम्र में जरायम की दुनिया में कूदा था अनुज
संवाद न्यूज एजेंसी
मऊ/चिरैयाकोट। मुख्तार अंसारी गैंग का शार्प शूटर और दोनों हाथों से बंदूक चलाने के लिए कुख्यात अनुज का अंत हो चुका है। एक तरफ गुड्डा सिंह, मन्ना सिंह हत्याकांड और इस मामले में दो गवाहों की हत्या में शामिल अनुज के एनकाउंटर पर उसके माता-पिता और रिश्तेदार मर्माहत दिखे। वहीं दूसरी तरफ अनुज के एनकाउंटर पर दिवंगत मन्ना सिंह के छोटे भाई भाजपा नेता ने अशोक सिंह खुशी जताई। उन्होंने प्रेसवार्ता कर कहा कि भगवान ने इंसाफ किया है। भगवान की महिमा है कि आका यानी मुख्तार अंसारी की पहली बरसी के दूसरे दिन ही गैंग के खास शूटर अनुज मारा गया। अनुज का एनकाउंटर प्रदेश सरकार की मजबूत कानून व्यवस्था के कारण संभव हुआ है। शनिवार को जमशेदपुर पर में अनुज के एनकाउंटर के बाद अमर उजाला की टीम रविवार को उसके गांव नवापुरा बहलोल पुर पहुंची। यहां अनुज के घर पर पिता हनुमान कनौजिया, माता सुशीला और कुछ महिलाएं बिलखती नजर आईं। पिता हनुमान ने अमर उजाला टीम से कहा कि कोई पेट से अपराधी बनकर नहीं निकलता है। अनुज व्यापारी बनना चाहता था। वह अक्सर बाजार में दुकान खोलने की बात कहता था। रिटायर्ड सरकारी शिक्षक पिता ने कहा कि सन् 2000 बड़े बेटे मनोज की साजिश के तहत हत्या हुई थी। पुलिस मनोज की हत्या को मुठभेड़ बताती रही। इस घटना के बाद अनुज ने बदला लेने के लिए जरायम की दुनिया में कूद पड़ा। बताया कि इसी साल अनुज हाईस्कूल के बाद आजमगढ़ आईटीआई में जनपद में टॉप किया था। उस समय अनुज की उम्र 16 साल थी। बताया कि 2003 में सरद सिंह निवासी सेचूई की हत्या हुई थी। इस मामले में मुझे और अनुज को आरोपी बनाया गया। हम दोनों को जेल भेजा गया था। बताया कि 2023 में प्रशासन ने घर को ध्वस्त करा दिया। अब मैं झोपड़ी में ही रहता हूं l
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ऐसे हुई अनुज की जरायम की दुनिया में एंट्री
मऊ। पिता हनुमान कनौजिया ने बताया कि पट्टीदार अच्छेलाल और छोटेलाल से घर के पास वाली जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इस विवाद में बेटे मनोज का गांव भटोली निवासी प्रमोद सिंह से विवाद हो गया था। इसी विवाद में विरोधियों ने बड़े बेटे मनोज को मारपीट कर घर के पास की पोखरी के किनारे फेंक दिया था l इसी विवाद 1994 में दीपावली के एक दिन बाद 10 बजे रात में प्रमोद सिंह की हत्या अनुज के बड़े भाई मनोज ने कर दी थी। 2000 में पुलिस ने मुठभेड़ में मनोज को मार गिराया। उस समय जिले की तत्कालीन एसपी मीरा रावत थीं। चार साल बाद 2004 में दीपावली के एक दिन पहले पटाखा खरीद रहे गुड्डा सिंह की हत्या अनुज ने कर दी। फिर 2003 में गुड्डा सिंह के भतीजे सरद सिंह की भी हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड में भी अनुज को आरोपी बनाया गया था। चाचा-भतीजा की हत्या के बाद गाजीपुर जेल में जाने के बाद अनुज मुख्तार अंसारी के संपर्क में आया। इसके बाद उसका आतंक का ग्राफ बढ़ गया। रानीपुर और चिरैयाकोट थाना क्षेत्र में अनुज का इतना आतंक था उस इलाके के दुकानदार रंगदारी और अन्य समस्या से बचने के लिए नंबर तक बदल देते थे। दोनों हाथ से गोली चलाने और अचूक निशाना के चलते अनुज मुख्तार का खास शूटर बन गया। जिले के मशहूर ठेकेदार मन्ना सिंह की हत्या नगर के गाजीपुर तिराहे पर दिनदहाड़े कर दी गई। इस मामले में गवाह राम सिंह मौर्य और एक सिपाही की हत्या में अनुज मुख्य आरोपी था।
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अनुज के एनकाउंटर के बाद मन्ना सिंह के भाई अशोक सिंह ने मनाई दिवाली
मऊ। ढाई लाख के इनामी बदमाश अनुज कनौजिया को जमशेदपुर में शनिवार की रात एनकाउंटर में पुलिस ने मार गिराया। इसकी सूचना मिलते ही ठेकेदार मुन्ना सिंह के भाई भाजपा नेता अशोक सिंह ने झूम उठे। आवास पर परिजनों और समर्थकों को मिठाई खिलाकर खुशी जताई। आज हमारे लिए दिवाली है हमारे परिवार ने 16 साल से होली नहीं मनाई है। भाई के हत्यारे को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया यह मेरे लिए खुशी की बात है। कि मुख्तार अंसारी की मौत के बाद हम लोगों ने 16 साल बाद होली मनाई और आज अनुज कनौजिया के एनकाउंटर के बाद दिवाली मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार में माफिया और गुंडे या तो जेल में है या फिर ऊपर चले गए हैं। कहा कि मन्ना सिंह हत्याकांड ने पूरे पूर्वांचल को जाग जोड़ कर रख दिया था दिनदहाड़े हत्या से पूरे जिले में सनसनी फैल गई थी।अनुज के एनकाउंटर के बाद सभी को बहुत खुशी हुई।