मऊ। जल निगम के कार्य का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि छह माह पूर्व हुई जांच में जिले के 199 गांवों में फ्लोंराइड की मात्रा ज्यादा पाई गई। लेकिन इस समस्या से निजात के लिए विभाग की तरफ से कोई कार्ययोजना आज तक नही तैयार की गई। गांव के लोग भले ही फ्लोराइड की अधिकता से अर्थो रोग से ग्रसित हो विभाग को इससे सरोकार नहीं है।
शासन के आदेश पर समय-समय पर भूगर्भ की जांच की जाती है, इसक्रम में छह माह पूर्व जिले में आई जल निगम की टीम ने जिले के विभिन्न गांवों के भूगर्भ की जांच किया था। जांच भी जलनिगम के लैब में हुई थी। इस दौरान जिले के 199 गांवों के भूगर्भ जल में फ्लोराइड की मात्रा आवश्यकता से अधिक पाई गई। लेकिन विभाग की तरफ से इस पर कोई कवायद नहीं की जा सकी। बात करने पर अधिशासी अभियंता एके शर्मा ने बताया कि रिपोर्ट को शासन भेज दिया गया है। अब शासन स्तर से ही इस समस्या से निदान की योजना बनाई जाएगी।
बताते चले जिले में कुल 673 ग्राम पंचायतें हैं। शासन की तरफ से लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल निगम को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसक्रम जांच के दौरान जिले के नौ ब्लाकों के गांवों में भूगर्भ जल में फ्लोराइड मिलने पर नजर डाला जाए तो बड़रांव के 13 गांव, दोहरीघाट ब्लाक के चार, फतहपुर मंडाव ब्लाक के 37 गांव, कोपागंज ब्लाक के 52 गांव, मुहम्मदाबादगोहना ब्लाक क्षेत्र के 16 गांव, परदहां ब्लाक के 14 गांव, रतनपुरा ब्लाक के 63गांव शामिल हैं।
पानी की जांच के लिए मुख्यालय स्थित जलनिगम के कार्यालय परिसर में लैब भी स्थापित किया गया है। इस बाबत जल निगम के अधिशासी अभियंता एके शर्मा का कहना है कि फ्लोराइड प्रभावित गांवों की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। शासन से कार्ययोजना के साथ बजट जारी होने पर उसके निदान पर काम किया जाएगा।