जरीना को गैस सिलेंडर कनेक्शन प्रदान करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। फाइल फोटो
पेट्रोलियम कंपनियों की बड़ी-बड़ी होर्डिंग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मौजूद ‘उज्ज्वला’ योजना की ब्रांड एंबेसडर के तौर पहचान बना चुकी जरीना फिर हकीकत के कठोर धरातल पर आ गई है। पेट्रोलियम मंत्री से लेकर कई मंत्रियों एवं सरकारी अधिकारियों के साथ रहने पर उसे लगा था कि उसके अच्छे दिन आने वाले हैं लेकिन फिलहाल गैस सिलेंडर को भरवाने के लिए उसके पति की कमाई पूरी नहीं पड़ रही है। उसे एक अदद आवास तक नहीं मिल सका है। छह बच्चों और पति के साथ जरीना आज भी परेशानी भरी जिंदगी जी रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी महत्वाकांक्षी ‘उज्ज्वला’ योजना का शुभारंभ बलिया जिले में एक मई, 2016 को किया था। योजना की पहली लाभार्थी मऊ जिले के दुबारी की जरीना बताती हैं कि कभी सोचा भी नहीं था कि मैं प्रधानमंत्री से मिलूंगी। एक सरकारी अधिकारी ने घर आ कर बताया तो यकीन नहीं हुआ। एक मई को प्रधानमंत्री के हाथों से रसोई गैस का कनेक्शन मिला तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
ठेला लगाकर घर चलाने वाले जरीना के पति नूर आलम कहते हैं कि लाभार्थी के तौर पर चुने जाने के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का घर पर तांता लग गया। उनकी टीम ने हमारेरहन-सहन, बात-व्यवहार, खान-पान के कई वीडियो बनाए । 27 मई, 2016 को हम दोनों हवाई जहाज से बनारस से दिल्ली पहुंचे। जरीना बताती है यह सब एक सपने के समान था। दिल्ली में हमें बड़े-बड़े होटलों में ठहरने-खाने का मौका मिला। हम दोनों को दिल्ली घुमाया गया। डिनर सेट, कपड़े, वीआईपी अटैची आदि कई गिफ्ट भी मिले।
हम लौट कर घर आए तो यहां मिलने वालों का सिलसिला लगा रहा। होर्डिंगों पर प्रधानमंत्री के साथ देखकर सभी चर्चा करते थे कि अब तुम्हारे अच्छे दिन आएंगे लेकिन आज हालत यह है कि जो सिलेंडर मिला है उसे पति के कमाए पैसे से भरवाने भर की स्थिति नहीं है। जिंदगी छह बच्चों के परिवार का पेट पालने में ही उलझ कर रह गई है। कहा, पेट्रोलियम मंत्रालय के लोगों ने आवास सहित आर्थिक मदद का आश्वासन दिया था। अच्छा होता कि जो पैसा हम पर खर्च किया गया उसी से हमें एक घर दे दिया जाता।