घोसी के बड़ागांव में अली असगर की याद में शब्वेदारी में नौहाखानी करते अकीदतमंद।
- फोटो : mau
नगर के बड़ा गांव शिया मोहल्ले में 25 सफर रविवार को दोपहर एक बजे अब्बासी बीबी सहन के पास कमेटी अलीवारिस ने शब्बेदारी का आयोजन किया। शब्बेदारी जनाबे अली असगर की याद में की गई। इससे पूर्व मौलान ने मजलिस को खिताब किया तो वहीं अंजुमनों ने नौहा और मातम किया। जनाबे असगर की शहादत का बयान सुनकर कर अजादार रोने लगे।
मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना मुजाहिर हुसैन ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने 14 सौ साल पहले कर्बला में जुल्म और जालिम के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।
जहां इंसानियत जिंदा है, वहां कर्बला का पैगाम भी जिंदा है। मौलाना ने बताया कि 10 मोहर्रम को जब ख्यामे हुसैनी में पानी न रहा बच्चे पानी-पानी की आवाज बलन्द करने लगे तो इमामे हुसैन ने मौला अब्बास को पानी के लिए भेजा लेकिन यजीदी फौजियों ने दरिया के किनारे बाजू काट कर उन्हें शहीद कर दिया। निजामत मौलाना शफ़क़त तक़ी ने किया। अंजुमनों ने नौहा मातम कर शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश की। इस दौरान डॉ शानू , अरशद, इजहारुल हसन, तफहिम, नोहाखान शमीम हैदर, इम्तेयाज, मोहम्मद अली नासरी, असगर नासरी, वसीम आदि रहे।