जिला अस्पताल में बच्चे को एंटी रैबिज का इंजेक्शन लगाते स्वास्थ्यकर्मी।संवाद
मऊ। सुबह टहलने वालों को कुत्ते निशाना बना रहे हैं। कुछ माह पहले किसान की पागल कुत्ते के काटने से मौत हो गई थी।
वहीं रोज 150 से ज्यादा मरीज एंटी रेबीज लगवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। अगर पूरे जिले में सीएचसी का आंकड़ा देखें तो यह संख्या रोज 300 से ज्यादा पहुंच रही है। इसमें अभी निजी अस्पताल का आंकड़ा शामिल नहीं है।
जिला अस्पताल के एंटी रेबीज के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में हर महीने औसतन 4000 हजार लोगों को कुत्ता काट रहा है। जबकि दस सीएचसी के मरीजों को जोड़ कर यह आंकड़ा 6 हजार तक पहुंच रहा है। शनिवार को ही जिला अस्पताल में 157 लोगो को एंटी रैबिज इंजेक्शन लगाई गई है।
इसमें निज़ामुद्दीनपूरा निवासी मोहित ने बताया कि उन्हें टहलते समय एक कुत्ता ने चार दिन पहले काट दिया था। इसी तरह से दुबारी के रमेश ने बताया कि शुक्रवार को वह शाम को बाजार से लौट रहे थे कि बाइक की हल्की से टक्कर होने पर एक कुत्ते ने काट दिया था।
सीएमएस डॉ धनंजय कुमार ने बताया कि डॉग बाइट के मामले मरीज को चार इंजेक्शन लगाई जाती है।ज्यादातर कुत्ते 25 से 45 साल के बीच लोगों शिकार बना रहे हैं। लोग सुबह मार्निंग वॉक या दौड़ने के लिए निकलते हैं। वहां पर कुत्ते उन्हें शिकार बना लेते हैं।
उन्हें पकड़ने को लेकर किसी तरह का दिशा निर्देश निकाय प्रशासन को नहीं मिला है। यहा शेल्टर होम की व्यवस्था नहीं है। जिले के दस सामुदायिक और 40 प्राथमिक स्थास्थ्य केंद्रों पर 200 के करीब एंटी रैबिज इंजेक्शन लगवाने लोग पहुंच रहे हैं।
ग्रामीण अंचलों में रात तो शहर में मार्निंग वॉक दौरान घटनाएं अधिक हो रही हैं। जिला अस्पताल में बीते तीन माह में एंटी रैबिज इंजेक्शन की खपत में बढ़ी है।