बनियाबान मोड़ पर संचालित नर्सिंग होम के खिलाफ एक प्रसूता के परिवारीजन का गुस्सा रविवार को बाहर आया। नर्सिंगहोम में ही दो सप्ताह पूर्व प्रसूता की डिलीवरी हुई ।
इसके बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। लेकिन फिर हालत खराब होने पर परिवारीजन उसे वाराणसी ले गया। जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत की खबर सुनने के बाद परिवारीजन ने नर्सिंगहोम पर हंगामा किया और इसकी शिकायत सीएमओ से की।
थाना क्षेत्र के ग्राम सभा नत्थूपुर की सीमा पत्नी सतपाल को 26 सितंबर को डिलीवरी के लिए मधुबन के बनियाबान मोड़ पर स्थित एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था।
आपरेशन से डिलीवरी हुई। आठ दिन अस्पताल में रखने के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया। परिवारीजन के अनुसार सीमा को अस्पताल में भर्ती कराते समय कराई गई जांच में आवश्यकता से काफी कम यानी कुल 6.30 यूनिट ही रक्त था।
परिवार वाले महिला को हायर सेंटर रेफर करने या खून चढ़ाने की बात कहते रहे। लेकिन डॉक्टर ने कहा की घबराने की बात नहीं है, प्रसव के बाद सब ठीक हो जाएगा। लेकिन दो-तीन दिन बाद से ही महिला के शरीर में सूजन होने लगी। डॉक्टर ने इसपर ध्यान नहीं दिया। डाक्टर ने आठ दिन बाद सीमा का टांका काटकर छोड़ दिया।
लेकिन इस बीच सीमा की तबीयत बिगड़ती चली गई। डॉक्टर की सलाह के मुताबिक परिवारीजन महिला को दवा देते रहे। नौ तारीख को जब ज्यादा तबियत खराब हुई तो परिवारीजन ने उसे जिला मुुख्यालय स्थित फातिमा अस्पताल ले गए। लेकिन वहां सीमा की गंभीर हालत को देखते हुए उसे भर्ती नहीं किया गया। इसपर उसे बीएचयू ले जाया गया। यहां भी उसे एडमिट नहीं किया गया।
परिवार वाले उसे एक निजी अस्पताल में ले गए। लेकिन वहां पहुँचते ही रविवार की सुबह प्रसूता ने दम तोड़ दिया। इस बात की सूचना जैसे ही परिवारीजन को मिली तो वे आक्रोशित हो गए। सुबह से ही अस्पताल पर हंगामा मचाना शुरू कर दिया। हंगामा देख आसपास के दर्जनों लोग इकट्ठा हो गए। मामला बिगड़ता देख किसी ने पुलिस को फोन कर दिया। मौके पर पुलिस ने पहुंचकर हंगामा शांत कराया।