जिले में छठ पूजा की तैयारियां शनिवार को पूरी हो गईं। सूर्योपासना का पर्व शुक्रवार को जहां नहाय खाय के साथ शुरू हो गया वहीं शनिवार को व्रती महिलाओं ने खरना करने के बाद निर्जला व्रत रखने का संकल्प लिया। महिलाओं ने पर्व के मद्देनजर जमकर दिन भर खरीदारी भी की।
सूर्य पूजा की परंपरा बहुत ही पुरानी है। सूर्य पूजा का विशिष्ट दिवस सूर्य षष्ठी है, जिसे डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है। छठ पर्व पर बड़े ही धूमधाम से अस्ताचलगामी सूर्य की आराधना की जाती है। कार्तिक शुक्ल सप्तमी को उदीयमान भगवान दिनकर को अर्ध्य देकर उनसे मन्नत मांगी जाती है। महिलाएं अपने पुत्र और सुख समृद्धि की कामना करती हैं।
जिनकी कोख सूनी है, वह महिलाएं भी विश्व देवता को नमन करेंगी। कहते हैं कि इसी दिन वेदमाता गायत्री का जन्म हुआ था। साथ ही इसी दिन ऋषि विश्वामित्र के मुख से गायत्री मंत्र उद्भव हुआ था। तभी से ही छठ पूजा की परंपरा शुरू हुई। इसी मान्यता के तहत व्रती महिलाओं ने शुक्रवार की शाम को लौकी की सब्जी और चने की दाल के साथ ही अरवा चावल के भात से व्रत की शुरुआत की।
शनिवार को खरना किया। छह नवंबर को विधि विधान से महिलाएं अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी। साथ ही सात नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगी। शुक्रवार को दिन भर लोगों को पवित्र पोखरों, नदी तट आदि स्थानों पर लोगों ने वेदी बनाया। महिलाओं ने बाजारों में सूप, डलिया, पूजा सामग्री और फलों आदि की खरीदारी की।
रानीपुर, नदवासराय संवाददाता के अनुसार छठ पर्व की तैयारी में रानीपुर ब्लाक के विभिन्न बाजारों में शनिवार को भारी भीड़ नजर आई। इस दौरान छठ पर्व की खरीदारी करने के लिए बाजारों में चहल-पहल थी। क्षेत्र के खुरहट, पलिया, कांझा, रानीपुर, आदि बाजारों में फलों की दूकाने सजी थी।