तमसा में प्रतिदिन गिर रहा 10 टन कचरा
जिस तमसा सफाई अभियान को लेकर जिला प्रशासन ही नहीं बल्कि नगरवासियों ने जी-जान लगाकर उसे साफ करने के लिए महीनों पसीना बहाया। पवित्र नदी को साफ करने के लिए जिला प्रशासन नगरपालिका प्रशासन एवं आम नागरिकों ने मिलकर साफ किया, आज उसके प्रति खुद नगरपालिका ही उदासीन बनी हुई है।तमसा सफाई अभियान का श्रेय लेकर जिला प्रशासन ने वाहवाही भी लूटा था। तत्कालीन जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव को इस कार्य के लिए राष्ट्रीय स्तर की एक संस्था ने सम्मानित किया।
लेकिन यह तमसा आज फिर से अपने बदाहाली पर आंसू बहा रही है। इसके प्रति न तो जिला प्रशासन का ध्यान है और न ही नगरपालिका प्रशासन एवं आम नागरिकों सहित तमसा सफाई अभियान से जुड़े स्वयंसेवी संगठनों का।जिले में तमसा लगभग 30 किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है। इस नदी का उल्लेख रामायण जैसे पवित्र ग्रंथ में भी मिलता है। इसके पौराणिक महत्व को देखते हुए ही इस नदी को स्वच्छ करने के लिए वर्ष 2014 में तत्कालीन जिलाधिकारी कुमुदलता श्रीवास्तव ने सबसे पहले सफाई अभियान चलाकर श्रमदान के माध्यम से इसे हमेशा ही साफ रखने की पहल करते हुए खुद ही सफाई अभियान में जुटीं। उनके जाने के बाद इस कार्य को वर्ष 2016 में तत्कालीन जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने किया।
उन्होंने कई सेक्टरों में नदी को बांटकर हर सेक्टरों में न सिर्फ सफाई कराई बल्कि इसके स्वच्छ रखने के लिए वृहद कार्ययोजना भी तैयार कराई। इस अभियान में मुगल कालीन बने पुल के मलबेे को गया घाट से हटाया गया, वहीं उसके पश्चिम कुंड को गंगा तमसा सेवा मिशन के लोगों ने मलबे को हटाया।एक महीने से भी अधिक समय तक चले इस अभियान के तहत काफी उम्मीद जगी थी कि नगर क्षेत्र का तमसा का किनारा जो गंदगी के लिए जाना जाता था वह अब रमणीय स्थल के रूप में जाना जाएगा। लेकिन उदासीनता का आलम यह है कि खुद नगरपालिका इस अभियान का भूल चुका है। प्रतिदिन तमसा के किनारे नगर का लगभग दस टन कचरा पाटा जा रहा है।