मधुबन तहसील बार के अधिवक्ताओं ने मंगलवार को भी एसडीएम के खिलाफ आंदोलन जारी रखा। न्यायिक कार्यों का बहिष्कार करते हुए एसडीएम की बुद्धि और तहसील के शुद्धिकरण के लिए तहसील परिसर स्थित मंदिर पर हवन पूजन किया। इससे पहले सोमवार को एसडीएम हटाइए, मधुबन बचाइए का नारा लगाते हुए जुलूस निकाला था।
अधिवक्ताओं का कहना था कि एसडीएम की मनमानी और भ्रष्टाचार कार्यों को लेकर बुद्धि व शुद्धिकरण के लिए ये पूजन किया गया है। यदि एसडीएम का स्थानांतरण नहीं होता है तो आगे भी उनका आंदोलन जारी रहेगा। तहसील बार के अध्यक्ष अरुण कुमार त्रिपाठी ने बताया कि एसडीएम के द्वारा न्यायिक कार्य की गरिमा का पालन नहीं किया जा रहा है।
विधिक प्रक्रियाओं को पालन न करते हुए पत्रावालियों को अनियमित तरीके से पारित किया जा रहा है। हमारी मांग है कि एसडीएम मधुबन का यहां से स्थानांतरण किया जाय और अब तक जारी सभी पत्रावालियों को तलब कर उनकी न्यायिक समीक्षा की जाय।
इस दौरान तहसील बार के मंत्री वीरेंद्र यादव, सत्यराम यादव, अविनाश मल्ल, अश्वनी कुमार मिश्रा, जितेंद्र यादव, संतोष तिवारी, आनंद त्रिपाठी, धनंजय पाठक, तुंगनाथ चौबे, रणधीर यादव, विनोद मल्ल, योगेश चौबे, अमरेश मिश्रा और रामेश्वर मल्ल आदि अधिवक्ता मौजूद थे।
मधुबन के समर्थन में उतरा मुहम्मदाबाद गोहना अधिवक्ता संघ
मधुबन तहसील में एसडीएम के खिलाफ चल रहे आंदोलन के समर्थन में मुहम्मदाबाद गोहना अधिवक्ता संघ ने भी मंगलवार को कार्य बहिष्कार किया। अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष फिरोज अहमद सिद्दीकी और मंत्री उमाशंकर यादव ने बताया कि मधुबन एसडीएम की तानाशाही रवैया, अधिवक्ताओं के साथ अमर्यादित आचरण और भ्रष्टाचार में संलिप्त रहने के चलते मधुबन के अधिवक्ता 25 अप्रैल से कार्य बहिष्कार कर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। एसडीएम और तहसीलदार के विरोध में अधिवक्ताओं ने नारेबाजी नारेबाजी की।
घोसी तहसील बार के अधिवक्ताओं ने एसडीएम और तहसीलदार के स्थानांतरण की मांग
की मांग और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए मंगलवार को नारेबाजी की। महामंत्री राजेश सोनकर ने बताया कि तहसील कार्यालय में और न्यायालयों में प्राइवेट व्यक्तियों को रखकर दस्तावेजों के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है, जिससे पूरा प्रशासनिक तंत्र दलालों के इशारे पर चल रहा है।
स्थानांतरण नहीं होने पर न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी। इस दौरान जयहिंद सिंह, राजेंद्र यादव, जनार्दन यादव, पीसी राय, नदीम अख्तर, संतोष, राम बदन, सतीश पाण्डेय, पूर्व महामंत्री ब्रजेश पांडेय, उमाशंकर उपाध्याय आदि अधिवक्ता मौजूद थे।