मऊ। अगस्त में बिना पंजीकरण के चलने वाले अलग-अलग अस्पतालों में चार महिलाओं की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 17 दिनों में 40 अस्पतालों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें सील किया गया। स्वास्थ्य विभाग अब इन अवैध अस्पतालों के खिलाफ एलआईयू के साथ मिलकर कार्रवाई करेगा।
नगर सहित जिले के नौ ब्लॉकों में अब भी बिना पंजीकरण के चलने वाले कई अस्पताल चल रहे हैं। लेकिन टीम के पहुंचने से पहले वह अस्पताल बंद कर फरार हो जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि ऐसे अस्पताल संचालकों को पहले नोटिस दिया जाएगा, इसके बाद नोटिस का जवाब न देने की स्थिति में प्रशासन और पुलिस बल के साथ स्वास्थ्य विभाग चिह्नित अस्पतालों के बंद होने के बाद भी उसे सील करने की कार्रवाई करेगी।
सीएमओ डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि बीते दो सितंबर को रतनपुरा में तीन, जबकि चार सितंबर को मुहम्मदाबाद गोहना में एक अस्पताल सील किया गया। वहीं 5 सितंबर को एक साथ 22 टीमों ने नगर में चार तो नौ ब्लाकों में 30 अस्पताल एक ही दिन सीज किया था। बताया कि अभियान के तहत 40 अस्पताल सील हो चुके है। बिना पंजीयन के संचालित अस्पतालों पर कार्रवाई जारी रहेगी लेकिन अब स्वरूप बदल जाएगा। इसके तहत अब पुलिस प्रशासन की गोपनीय जांच शाखा से मिलकर अस्पताल खोलने के कुछ देर में संबंधित सीएचसी की टीम उसे सील करने की कार्रवाई करेगी। बताया कि बीते दिनों में मधुबन में ऐसा ही किया गया था, जहां एक जागरूक नागरिक द्वारा बिना पंजीयन के संचालित अस्पताल की सूचना दी। जिसके बाद फतेहपुर मंडाव सीएचसी प्रभारी डॉ. राजीव कुमार पांडेय ने टीम को पहले बाइक से भेजा, जिसके बाद यह टीम ने अस्पताल से पहले ही बाइक छोड़कर पैदल अस्पताल पहुंचकर उसे सील की। नौ ब्लॉकों में अस्पतालों की सूची विभाग की ओर से बनाई जा चुकी है। बताया कि नोटिस देने के बाद भी अस्पताल दुबारा संचालित करते पाए जाने पर सील करने के साथ विधिक कार्यवाही विभाग संबंधित अस्पताल संचालक के खिलाफ करेगा। उधर इस मामले में एसपी इलामारन जी ने बताया कि जनहित के इस मुद्दे में पुलिस प्रशासन स्वास्थ्य विभाग का साथ देगा। स्वास्थ्य विभाग से इस संबंध में अभी मौखिक सूचना मिली है। पत्राचार होते ही इसको रणनीति तैयार होगी।
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17 दिनों में एक भी मौत नहीं आई
मऊ। जिले में बिना पंजीयन के संचालित अस्पताल में मौत का पहला मामला 6 अगस्त को आया, जहां मधुबन के ढिलई फिरोजपुर में बिना पंजीयन के संचालित अस्पताल में सुमन की मौत गलत ऑपरेशन के चलते हो गई। इसके बाद 24 दिन बाद बलिया मोड़ स्थित अस्पताल में गर्भवती सुमन की मौत हो गई। नगर में 29 अगस्त को ब्रह्मस्थान पर एक अस्पताल में तीसरी महिला की मौत हो गई। इसके अगले दिन मुहम्मदाबाद गोहना में एक अस्पताल में फिर अंजू की गलत ऑपरेशन के चलते मौत हो गई थी। लेकिन 29 अगस्त से शुरू हुए अभियान का असर यह है कि 17 दिन में किसी भी अस्पताल में कोई मौत की सूचना अब तक नहीं आई है।
अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई के बाद सरकारी अस्पतालों में बढ़े मरीज
अवैध अस्पतालों में कमीशन की मिलीभगत में महिला स्वास्थ्यकर्मी और आशाओं के शामिल होने के विभागीय जांच भी हो रही है। उधर ताबड़तोड़ कार्रवाई का सकारात्मक असर भी देखने को मिल रहा है। 17 दिन में महिला जिला अस्पताल में अकेले गर्भवती महिलाओं की जांच का ग्राफ 15 फीसदी तक बढ़ गया है। जहां पहले यह ग्राफ 500-600 था अब वह 800 से अधिक पहुंच रहा है।