मऊ में जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामेश्वर ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/ एमपीएमएलए कोर्ट श्वेता चौधरी द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध दाखिल परिवाद को क्षेत्राधिकार से बाहर होने के चलते खारिज करने के आदेश के विरुद्ध दाखिल निगरानी को खारिज कर दिया। जिला जज ने अपने आदेश में लिखा कि एसीजेएम के आदेश में कोई अवैधता अनियमितता नहीं है। जो आदेश पारित किया है वह विधि सम्मत है।
मामले के अनुसार दोहरीघाट थाना क्षेत्र के कस्बा दोहरीघाट निवासी नवल किशोर शर्मा पुत्र देवनाथ शर्मा ने सीजेएम कोर्ट में एक परिवाद दाखिल किया था। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आरोपी बनाते हुए उन्हें विचारण हेतु तलब करने अनुरोध किया था। उनका कथन था कि आदित्यनाथ ने राजस्थान प्रदेश में हो रहे सामान्य विधानसभा चुनाव के दौरान सार्वजनिक सभा में 28 नवंबर 2018 को अलवर जिले के मालाखेड़ा में जनसभा को संबोधित करते हुए परिवादी के इष्ट देव बजरंगबली में श्रद्धा रखने वाले समुदायों के आस्था को आहत पहुंचाई है।
सुनवाई के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/ एमपीएमएलए कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा था कि घटनास्थल राजस्थान राज्य में स्थित है। ऐसी स्थिति में जनपद मऊ में इस न्यायालय को प्रस्तुत परिवाद को सुनने का क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं है। परिवाद को क्षेत्राधिकार के अभाव में खारिज कर दिया था। इस आदेश के विरुद्ध जिला जज के न्यायालय में निगरानी दाखिल की गई थी, जिसे सुनवाई के बाद जिला जज ने खारिज कर दिया।