जहां हत्यारा पीड़िता के शारीरिक ढांचे को नष्ट करता है, वहीं बलात्कारी असहाय महिला की आत्मा को मलिन एवं अशुद्ध कर देता है। यह अपराध पीड़िता के जीवन को पशुवत या नारकीय बना देता है और उसकी आत्मा को झकझोर देता है।
यह टिप्पणी सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर एक दीप नारायण तिवारी ने महिला को शादी के आशय से भगाने तथा उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी निरंजन उर्फ झब्बू सिंह को सुनवाई के बाद दोषी पाए जाने पर उसे दुष्कर्म के मामले में 10 वर्ष की सजा सुनाते हुए कही।
साथ ही 13 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न देने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। एडीजे ने सजा सुनाते समय अपने निर्णय में लिखा कि दंड अधिरोपित करते समय न केवल अभियुक्त, अपितु पीड़ित व्यक्ति की सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक पृष्ठभूमि को भी विचार में लेना होता है।
अपराध की गंभीरता, अभियुक्त तथा पीड़िता का परस्पर संबंध और कारित किए गए अपराध का समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान में रखना होता है।
मामला सरायलखंसी थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार पीड़िता को आरोपी ने 27 फरवरी 2020 को शादी के आशय से बहला-फुसलाकर मध्य प्रदेश के जबलपुर में बाई के बगीचा में ले जाकर रखा था।
आरोप है कि इस दौरान पीड़िता को सिलाई मशीन की दुकान व शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने मामले की एफआईआर दर्ज कर बाद विवेचना सरायलखंसी थाना क्षेत्र के रैकवारेडीह गांव निवासी निरंजन उर्फ झब्बू सिंह के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
न्यायालय में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी ने पांच गवाहों को पेश कर अभियोजन का पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है।
एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी निरंजन उर्फ झब्बू सिंह को शादी के आशय से भगाने और पीड़िता के साथ दुष्कर्म करने के मामले में दोषी पाया।
दोषी पाए जाने के बाद उसे दुष्कर्म के मामले में 10 वर्ष की सजा के साथ ही 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। वहीं शादी के आशय से भगाने के मामले में पांच वर्ष की सजा के साथ ही तीन हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न देने पर दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।