फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mau News: जुलाई महीने का बीता एक पखवाड़ा, नहीं भरी कॉलेजों में सीटें

विज्ञापन
विज्ञापन
एक दशक पहले जिले के राजकीय और सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में प्रवेश पाने के लिए मारामारी रहती थी लेकिन अब इन कॉलेजों में सीटें भरना चुनौती है। पंजीकरण की अंतिम तिथि दो बार बढ़ाई जा चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि कॉमन यूनिवर्सिटी टेस्ट लागू होने के बाद काफी संख्या में छात्र केंद्रीय विश्वविद्यालयों और प्रतिष्ठित संस्थानों का रुख कर रहे हैं। इसके साथ ही तकनीकी और प्रोफेशनल कोर्स की बढ़ती लोकप्रियता के कारण भी पारंपरिक स्नातक पाठ्यक्रमों में रुचि कम हुई है।
विज्ञापन

महाराजा सुहेल देव राज्य विश्वविद्यालय आजमगढ़ से संबद्ध जिले के तीन राजकीय, चार सहायता प्राप्त सहित 150 मान्यता प्राप्त महाविद्यालय हैं। बीए और एमए में प्रवेश प्रक्रिया जून माह से ही चल रही है, जुलाई माह में भी 19 दिन बीत गए लेकिन शत प्रतिशत सीटें नहीं भरीं। विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से प्रवेश की अंतिम तिथि 20 जुलाई निर्धारित की गई है। जिले के सबसे अधिक छात्र संख्या वाले डीसीएसके पीजी कॉलेज में स्नातक कला वर्ग में 1100 सीटें हैं। पहले आओ पहले पाओ के तहत प्रवेश प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अभी तक 480 सीटें ही भर पाई हैं। महाविद्यालय में सेल्फ फाइनेंस कोर्स बीएससी, बीकाम संचालित हैं। बीएससी में 400 सीटें हैं, 170 सीट पर प्रवेश हुआ है। बीकॉम में 300 के सापेक्ष 98 सीटों पर ही प्रवेश हो सका है। एमए में भूगोल में 18, एमए हिंदी में 16, एमए होम साइंस में एक, एमए उर्दू में पांच, एमए समाज शास्त्र में 14, एमए अंग्रेजी में 12 सीटों पर प्रवेश हुआ है। जबकि प्रत्येक विषय में 60-60 सीटें हैं। यह स्थिति डीसीएसके पीजी कॉलेज तक सीमित नहीं है। जिले के अन्य राजकीय और सहायता प्राप्त कॉलेजों में प्रवेश कम हुए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन को प्रवेश पंजीकरण की तिथि बार-बार बढ़ानी पड़ रही है। डीसीएसके पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शर्वेश पांडेय का कहना है कि तकनीकी और प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों की बढ़ती लोकप्रियता के कारण छात्र पारंपरिक स्नातक पाठ्यक्रमों में कम रुचि ले रहे हैं। प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि सभी सीटें भर जाएंगी।
इसी क्रम में राजकीय डिग्री कॉलेज मधुबन में बीए, बीएससी, बीकाॅम में 840 सीटें हैं। कॉलेज में 57 आवेदन आए हैं। 15 छात्रों ने एडमिशन लिया है। इस बाबत कॉलेज प्राचार्य डॉ. कमलेश कुमार का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026 तक है, लेकिन प्रवेश पंजीकरण की तिथि बढ़ने की उम्मीद है।
विज्ञापन






एक समय कतारें लगती थीं, अब सीटें भरने को जूझ रहा कॉलेज
1300 सीटों के सापेक्ष मात्र 477 पर हुआ है एडमिशन
संवाद न्यूज एजेंसी
मुहम्मदाबाद गोहना। एक ऐसा भी दौर था जब कस्बे के संत गणिनाथ राजकीय पीजी कॉलेज के गेट पर प्रवेश के लिए लंबी-लंबी कतारें लगती थीं। सीट न मिलने पर अभिभावक मंत्रियों और विधायकों से सिफारिश कराते थे। आज वही कॉलेज सीटें भरने के लिए जूझ रहा है। सत्र 2026-27 में खुला प्रवेश प्रक्रिया के बावजूद सीटें खाली हैं। छात्रों का रुझान अब रूटीन स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई से हटकर इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और मेडिकल जैसे प्रोफेशनल कोर्स की ओर बढ़ गया है। इसका असर कॉलेज के प्रवेश आंकड़ों में साफ दिख रहा है।
कॉलेज प्रशासन से मिले आंकड़ों के अनुसार स्नातक स्तर पर बीए की 560 सीटों के सापेक्ष केवल 256 प्रवेश हो सके हैं। बीएससी बायोलॉजी की 130 सीटें पूरी भर गई हैं, लेकिन बीएससी गणित की 130 सीटों में से अब तक सिर्फ 20 छात्रों ने ही प्रवेश लिया है। बीएससी बायोलॉजी में सभी सीटों के भर जाने से स्पष्ट है कि छात्रों में मेडिकल क्षेत्र को लेकर आकर्षण सबसे अधिक है।परास्नातक कला वर्ग स्तर पर हालात और चिंताजनक हैं। यहां पांच विषयों की मान्यता है। प्रत्येक विषय में 60-60 सीटें निर्धारित हैं। आंकड़ों के अनुसार अर्थशास्त्र में 4, संस्कृत में 4, हिंदी में 6, समाजशास्त्र में 14 और राजनीति विज्ञान में 17 प्रवेश हुए हैं। विज्ञान वर्ग के गणित में 14, फिजिक्स में 4 और केमिस्ट्री में 8 छात्रों ने अब तक प्रवेश लिया है। इस प्रकार परास्नातक की कुल 480 सीटों में से केवल 71 प्रवेश ही हो सके हैं। कम प्रवेश को लेकर माना जा रहा है कि 12वीं के बाद छात्र अब सीधे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट जा रहे हैं। तीन वर्षीय डिग्री के बाद रोजगार की अनिश्चितता के कारण छात्र प्रोफेशनल कोर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी कारण बीए और बीएससी गणित जैसे विषयों में प्रवेश घटा है। इस बाबत प्रवेश प्रभारी डॉ. विजय शंकर पांडेय का कहना है कि एडमिशन प्रक्रिया चल रही है। शत प्रतिशत सीटों को भरने का प्रयास जारी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें