मधुबन। क्षेत्र के फतहपुर ताल चंवर स्थित तिलक इंटर कालेज के प्रबंध कमेटी व विद्यालय के प्रधानाचार्य के बीच चल रहा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। लगातार तीसरी बार प्रबंध कमेटी ने विद्यालय के प्रधानाचार्य को गबन व भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित कर दिया। वहीं प्रधानाचार्य द्वारा आरोप को बेबुनियाद बताया जा रहा है।
फतहपुर ताल चंवर स्थित तिलक इंटर कालेज मेें सन 2011 में आयोग द्वारा डा. देवेंद्रनाथ पंाडेय की तैनाती की गई। प्रबंध समिति की मानें तो प्रधानाचार्य द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता में ध्यान देने के बजाय धन उगाही में ही ज्यादा समय लगा दिया गया। प्रबंधक एके मिश्र तथा अध्यक्ष आनंद प्रकाश की मानें तो प्रधानाचार्य द्वारा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के 2005 की छात्रवृत्ति लगभग 52 हजार रुपये जो किन्हीं कारणों से वितरित नहीं हो पाया था। उसे शासन को वापस करने के बजाय प्रधानाचार्य द्वारा हजम कर लिया गया है। यही नहीं मध्याह्न भोजन का लगभग 44 हजार, विज्ञान फंड का 52 हजार रुपये भी फर्जी तरीके से निकाल लिया गया है। इसके अलावा मृतक त्रिवेणी शर्मा के आश्रित में 2.50 लाख रुपये लेकर नियुक्ति की गई। इसके अलावा बोर्ड परीक्षा में भी नकल के नाम पर धन उगाही की गई। इसके बाद मामले की जानकारी होने पर प्रबंध समिति की ओर से प्रधानाचार्य से लिखित व मौखिक स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन प्रधानाचार्य द्वारा नहीं दिया गया। इसके बाद प्रबंध कमेटी ने पहली बार प्रधानाचार्य को 17 जनवरी 2013 को निलंबित कर इनके कक्ष में ताला लगा दिया। जिला विद्यालय निरीक्षक के हस्तक्षेप पर तीन दिन बाद ताला खुला और प्रबंध कमेटी ने सारे कागजों को सुरक्षित कर लिया। इस बीच जांच कमेटी ने कई बार प्रधानाचार्य से जवाब मांगा, लेकिन कोई सहयोग नहीं मिला। दूसरी बार 17 मार्च 2013 को दूसरी बार निलंबित किया। इसके बाद भी वही स्थिति यथावत रहने पर कमेटी ने तीसरी बार 17 मई को निलंबित कर दिया। प्रबंधक एके मिश्र तथा अध्यक्ष आनंद प्रकाश मिश्र का कहना था कि जब तक लेखा रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक प्रबंध तंत्र निलंबित करता रहेगा। प्रधानाचार्य देवेंद्र नाथ पांडेय का कहना था कि मेरे ऊपर जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वह बेबुनियाद है। यह सब एक परिचारक द्वारा किया गया है। जिसका पता चलने पर मैंने उसे निलंबित कर दिया था। मेरे निलंबन का समय 60 दिन का था वह अब पूरा हो गया है।