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घटतौली से उबाल, फिर भी मजबूर

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मऊ। रसोई गैस के लिए जिले में मारामारी मची है। गैस सिलेंडर की कमी और कालाबाजारी से लोग त्रस्त हैं। इसकी शिकायत जिला आपूर्ति विभाग से भी की गई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। जिलापूर्ति अधिकारी साफ तौर पर नकारते हैं कि उनसे कालाबाजारी और सिलेंडर की कमी को लेकर शिकायत की गई है। हालांकि प्रतिदिन कहीं न कहीं सिलेंडर को लेकर किचकिच की स्थिति देखी जा रही है। गैस गोदाम से लेकर एजेंसी तक उपभोक्ताओं की सुनने वाला कोई नहीं है।
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जनपद में रसोई गैस सिलेंडर की 14 एजेंसियां हैं। इसमें से चार नगर में और दस तहसील और ब्लाक इलाकों में हैं। इनसे जुड़े उपभोक्ताओ की संख्या करीब डेढ़ लाख है। एक गैस एजेंसी पर कम से कम तीन सौ सिलेंडर प्रतिदिन सप्लाई होती है। जिसमें जमकर धांधली की जा रही है। एक गैस एजेंसी के ट्राली मैन ने ही स्वीकार किया है कि गैस के गोदाम पर री-फीलिंग होती है। बताया कि तीन सौ सिलेंडरों से गैस निकाल कर कम से कम 50 अतिरिक्त सिलेंडर तैयार किए जाते हैं। ये सिलेंडर मार्केट में नहीं भेजे जाते हैं। इन्हें गोदाम में ही रखा जाता है। इसे ऐसे जरूरतमंदों को दिया जाता है जिन्हें अकस्मात जरूरत होती है। ऐसे ग्राहकों से तय रेट से ज्यादा दाम भी लिया जाता है।
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ग्राहकों का कहना है कि कृत्रिम कमी दिखाकर गैस गोदामों से सिलेंडर का वितरण नहीं किया जाता है।
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