यशोदा श्रीवास्तव/ वीरेंद्र चौहान
मऊ। भय और अंदेशे की काली चादर अंतत: तार-तार हुई। जीत सौहार्द की हुई। देखा जाए तो असली रावण बुधवार को ही मारा गया। तीन लाख की आबादी के बीच 55 फीसदी अल्पसंख्यकों वाले शहर मऊ में 16 अक्तूबर को लेकर अटकलें, आशंकाआें की चर्चाएं थीं। प्रशासन भी इस पर गंभीर था। सुरक्षा का ऐसा चाक चौबंद उत्तर प्रदेश के इतने छोटे किसी अन्य जिले में शायद कहीं रहा हो। बुधवार को सुबह छह बजे जब भरत मिलाप का कार्यक्रम सकुशल संपन्न हुआ तभी आगे के कार्यक्रम के उसी तरह संपन्न होने के शुभ वचन कसबे वासियों के मुख से सुनाई पड़ने लगे थे।
जब साढ़े सात बजे ईदउल अजहा की नमाज सकुशल हो गई तो निसंदेह प्रशासन ने ईश्वर को लाख लाख धन्यवाद दिया होगा। डीएम कुमुदलता श्रीवास्तव तथा एसपी दिनेश चंद्र दूबे बगल में ही स्थित नगरपालिका की छत पर मौजूद रहकर स्थिति पर नजर गड़ाए थे। दोनों अधिकारी रात दो बजे से ही जमे हुए थे। सुबह दोनों कार्यक्रमों के सकुशल संपन्न होते ही दोनों अधिकारियों ने एक दूसरे के साथ ही मऊ वासियों को भी धन्यवाद दिया। बोले यह सौहार्द की जीत है। उसके बाद तो हिंदू और मुसलमानों के बीच गले मिलकर मुबारकबाद का दौर देर शाम तक चलता रहा। 16 अक्तूबर का दिन निसंदेह मऊ के लिए खौफनाक रहा है। इसकी वजहें भी हैं। बकरीद और भरत मिलाप एक ही दिन पड़ा और दोनों समुदायों के कार्यक्रम शाही मस्जिद परिसर से ही संपन्न होते हैं। यहां भरतमिलाप का कार्यक्रम देर रात से शुरू होकर सुबह पौ फटने तक होता है। ईद उल अजहा की नमाज और भरत मिलाप संपन्न कराना प्रशासन के लिए चुनौती रहा है। भरत मिलाप में मस्जिद के गेट से राम, लक्ष्मण तथा सीता के विमान के टकराने का दृश्य पूरे कार्यक्रम का कलाइमेक्स होता है। हिंदू संगठन से जुड़े लोग इसे अपनी विजय मानते हैं।
लोगों में डर का होना भी अनायास नहीं था। 2005 के अलावा शहर में कई ऐसे मौके आए, जब दोनों सुमदाय एक दूसरे के आमने सामने आ गए थे । इस बार भी सारी आशंकाओं की जड़ वही पुराना इतिहास ही था। लेकिन भरत मिलाप के आयोजक रामलीला कमेटी के अध्यक्ष मदन सिंह तथा अल्पसंख्यकों के रहनुमा शाही कटरा मस्जिद के इमाम मौलाना महफुर्जुरहमान आदि का सामूहिक फैसला था कि वे नापाक मंसूबों को कामयाब नहीं होने देंगे। भरत मिलाप के आयोजकों ने तैयारी इस हिसाब से कर रखी थी कि नमाज के वक्त के पहले ही पूरा परिसर खाली कर दिया गया। अल्पसंख्यकों ने तारीफ की। इसके इतर सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन की जो तैयारी थी, कार्यक्रमों के कुशल पूर्वक संपन्न होने में उसका भी महत्वपूर्ण योगदान था।