मऊ। मुहम्मदाबाद गोहना तहसील के दौलसेपुर गांव के गोंड़ जाति के 45 लोगों को जारी किये गये जाति प्रमाण पत्रों को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय कास्ट समिति की बैठक में निरस्त कर दिए गए।इनमें दौलसेपुर गांव के प्रधान का जाति प्रमाण पत्र भी शामिल है। इस कार्रवाई के बाद ग्राम प्रधान की कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है। स्कूटनी समिति ने जिले के गोंड़ों को कहार जाति का मानते हुए कहा है कि जिले में यह कहार जाति में आते हैं जो ओबीसी में शामिल है।
दौलसेपुर गांव के प्रधान का पद अनुसूचित जन जाति के लिए आरक्षित था। इस गांव के प्रधान पदके लिए सुनील पुत्र महातम ने नामांकन किया और चुनाव जीत गए। इस गांव के मिथिलेश पांडेय ने रिटर्निंग अफसर के पास इसकी शिकायत किया कि सुनील गोंड जाति के हैं इस नाते ये ओबीसी वर्ग के हैं इसलिए उनका नामंाकन खारिज किया जाना चाहिए। रिटर्निंग अफसर ने नियमानुसार सक्षम अधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र का हवाला देते हुए मिथिलेश पांडेय की आपत्ति निरस्त किर दिया।इसके बाद मिथिलेश ने हाई कोर्ट की शरण लिया। हाई कोर्ट के निर्देशन पर 10 जनवरी 2018 को जिलाधिकारी प्रकाश बिंदु की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कास्ट स्क्रूटनी समिति की बैठक हुई। इस समिति में अपर जिलाधिकारी मन्नीलाल, जिला समाज कल्याण अधिकारी मुक्तेश्वर चौबे और उपजिलाधिकारी सदर कुमार हर्ष शामिल थे।समिति ने मुहम्मदाबाद गोहना की आख्या, समय समय पर जारी किए गए शासनादेशों , साक्ष्यों, तथ्यों का अवलोकन करने और प्रमाण पत्र धारकों के द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के बाद पाया कि मऊ जिले में गोंड़ कहार जाति में आते हैं , और यह जाति ओबीसी में आती है , न कि एसटी में। समिति ने दौलेस पुर गांव के गोंड जाति के 45लोगों को जारी किए गए अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र निरस्त कए दिया। इस संबंध में शिकायत कर्ता ने उपजिलाधिकारी न्यायालय में भी वाद दाखिल कर रखा है। इस बाबत उपजिलाधिकारी मुहम्मदाबाद गोहना डा.अनुप कुमार का कहना है कि साक्ष्य प्रस्त़ुत करने पर विधि संगत कार्रवाई की जाएगी। इस बाबत ग्राम प्रधान सुनील कुमार का कहना है कि वे जिला स्तरीय स्क्रूटनी समिति के निर्णय के विरुद्ध् मंडलायुक्त के यहां अपील करेंगे।