मऊ। रबी फसल की सिंचाई के पीक आवर में जिले में स्थापित 391 किलोमीटर की तीन नहरें अब किसानों के खेत का पेट पानी से भर पाने में असक्षम साबित हो रही हैं। दिसंबर का आधा समय बीत गया लेकिन अभी तक अधिकांश माइनरों में टेल तक पानी ही नहीं पहुंच सका है। सिंचाई के अभाव में गेेहूं सहित अन्य फसलों पर विपरीत असर पड़ रहा है। सब कुछ जानकर भी विभागीय अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
जिले में 2477 हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि की सिंचाई के लिए करोड़ों की लागत से बनी तीन नहरें है।इन तीनों प्रमुख नहरों के 70 माइनर हैं। रबी फसल के सिंचाई का पीक आवर चल रहा है। इस समय गेेहूं सहित अन्य फसलों के सिंचाई की सख्त जरुरत है, लेकिन अधिकांश माइनरों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। यदि किसी माइनर में पानी पहुंचा भी है तो तली में ही दिख रहा है। चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल दोहरीघाट से मऊ और बलिया मिलाकर हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित की जाने की क्षमता है। दिसंबर का आधा समय बीत गया लेकिन अभी तक अधिकांश माइनरों में पानी पहुंचा ही नहीं है। नहर का लाभ न मिल पाने से किसानों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है।
खुरहट पंप कैनाल का भी यही हाल है। कुछ एरिया में ही सिंचाई हो पा रही है। शारदा सहायक खंड 32 भी बैशाखी के भरोसे है। कभी कभार दोहरीघाट पंप कैनाल से पानी छ़ोड़ दिया जाता है। इस संबंध में किसान नेता देवप्रकाश राय, रविंद्र सिंह, राकेश सिंह, सूर्यप्रकाश यादव, महेंद्र नाथ का कहना है कि गेहूं की फसल सिंचाई योग्य हो गई है, लेकिन माइनर में पानी ही नहीं है। पीक आवर में विभाग की तरफ से नहरों की सिल्ट सफाई कराई जाती है। माइनरों में पानी अविलंब नहीं छोड़ा गया तो हम लोग चुप नहीं बैठेंगे। इस बाबत दोहरीघाट पंप कैनाल के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र पासवान का कहना है कि नहरों तथा माइनरों की सिल्ट सफाई के बाद पानी छोड़ दिया गया है। पानी पहुंचने में तीन से चार दिन का समय लगेगा।