सेवा सुरक्षा सहयोग समिति के तत्वावधान में क्षेत्र के गोठा स्थित गोठा रामशाला मंदिर परिसर में चल रही नौ दिवसीय रामकथा के पांचवे दिन ग्वालियर से पधारीं मानस मर्मज्ञ साध्वी लीला भारती ने कहा कि केवट में अनुराग था तो उसे राम मिले। शबरी रास्ता निहारते निहारते राम को पा गई। प्रभु के प्रेम में इतनी शक्ति है कि आप उनके शरण में जाओगे तो निश्चित ही आपको मुक्ति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि चौरासी लाख योनियो में सबसे श्रेष्ठ योनि मनुष्य की होती है, लेकिन हम ऐसे योनि में आकर भी संमार्ग पर नहीं चल पाते। हम संस्कार भुलते जा रहे हैं। हम रामचरितमानस तो पढते हैं लेकिन उसको अपने जीवन में नहीं उतार पाते। अगर राम के चरित्र को अपने जीवन में उतार लें तो जीवन धन्य हो जाएगा। रामचरितमानस सत्ता के त्याग की कथा है। वहीं महाभारत सत्ता के संघर्ष की कथा है। मानस हमें आदर भाव प्रेम तथा जीवन जीने की कला सिखाता है। राम केवट प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि जब राम ने कहा का हे केवट कुछ मांगो तो केवट ने सोना, चांदी नही मांगा बस भगवान राम के चरण धुलने की आज्ञा मांगी। भगवान राम का कोमल चरण धोकर धन्य हो गया। नीरज शास्त्री जी ने कहा कि केवट कहता है कि आप भी मजदूर हम भी मजदूर तो फिर नाव उतरायी की मजदूरी कैसी। कहाकि गंगा दर्शन से ही सभी पाप धुल जाते हैं। गंगा पापधारिणी है, जो समाज सेवक जनता के साथ छल करता है उसे जनता कभी माफ नहीं करती।