दुबारी। घाघरा की विनाश लीला को रोकने के लिए की जा रही तमाम कवायद विभागीय उदासीनता के चलते बेअसर साबित हो रही है। चार किमी देवारा क्षेत्र में प्रतिदिन 10 बीघे उपजाऊ जमीन नदी मेें विलीन होने से किसानों की चिंता बढ़ती ही जा रही है। बावजूद प्रशासन की ओर से कटान से निजात दिलाने की ठोस कार्य योजना तक नहीं बनायी जा सकी है।
घाघरा नदी के किनारे धर्मपुर मोलनापुर दुबारी के मौजा में हजारों एकड़ गन्ना की फसल बची है। कटान बिंटोलिया नई बस्ती से लेकर मोलनापुर तक लगभग चार किलोमीटर लंबी एरिया में कटान हो रही है। किसानों की मानें तो कटान से प्रतिदिन लगभग दस बीघे उपजाऊ जमीन नदी में विलीन हो रही है। घाघरा नदी कटान करते - करते बिंटोलिया पुरवा के करीब पहुंच गई है। जबकि नई बस्ती से मात्र एक किमी की दूरी पर है। नदी का रुख बस्ती की तरफ होने से लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं। कटान पीड़ितों का कहना है कि नदी का रौद्र रुप जारी रहा तो एक वर्ष के अंदर ही दोनों पुरवों का अस्तित्व ही मिट सकता है। प्रतिदिन किसानों की कृषि भूमि नदी में विलीन हो रही है, लेकिन कटान रोकने के उपाय नहीं किए जा रहेे हैं। अब तक शिवचन, अयोध्या, सुखारी, सुरेश बहादुर, जुम्मन, मुम्मदीन, खलील, छोटकन, खरभान, रजाक, गफार, राम सरीख, बासदेव, शेषनाथ राम, बचन, पल्लू, तिरथू, विंध्याचल, नागू, ओमकार, लाली, राधेश्याम, चंद्रशेखर, रामजीत, उमा, रामदेव, राम आधार, गोरख, चिखूरी, घूरा, रामप्रसाद, रामदवर, हरिंद्र, गोपाल, कन्हैया लाल, साहेब, रामप्यारे, शोला, गैसू, विधवासी, नाथा, फागू, छबि, बलि, बहादुर, कैलाश, सुरेश, भोला, रामसरीख, अमरजीत, थवलजीत, रामआशीष, रामधनी राम, सिंहासन, गनपति, बेचू, छांगूर, झगरु, चंद्रिका, बलेश्वर, श्रवण, खरभान, बहादुर राम, दशरथ, आशा, रामवृक्ष, सुन्नर, गंगा, केशा, फूलचन, जगरनाथ, नरेश, कौशिल्या, प्रहलाद, मरछू, चंदीप, कुबेर, सुदर्शन राम, आश्रय, चंद्रेव आदि लोगों का गन्ना तथा धान की फसल घाघरा में विलीन हो रही है। शिकायत के बाद भी समस्या से निजात नहीं दिलाई जा सकी है। इस बाबत उपजिलाधिकारी मधुवन निरंकार सिंह का कहना है कि मौका मुआयना कर शासन को रिपोर्ट भेजा जाएगा।