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बच्चों को सत्संग के लिए प्रेरित करें

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हिंदू युवा वाहिनी एवं नागेश्वरनाथ धर्माथ सेवा संस्थान के तत्वावधान में क्षेत्र के लैरोदोनवार स्थित प्राचीन शिवमंदिर के प्रांगण में चल रही नौ दिवसीय भागवत कथा के दूसरे दिन अयोध्या से पधारे आचार्य मणिराम दास ने कहा कि कलियुग में भागवत साक्षात श्रीहरि का रूप हैं। पावन हृदय से इसका स्मरण मात्र करने पर करोड़ों पुण्यों का फल प्राप्त हो जाता है। कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को संस्कारवान बनाने के साथ ही सत्संग कथा के लिए प्रेरित करें।
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भागवत कथा को सुनने के लिए देवी देवता भी तरसते हैं और दुर्लभ मानव प्राणी को ही इस कथा का श्रवण लाभ प्राप्त होता है। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही प्राणी मात्र का कल्याण संभव है। कहा कि सत्संग व कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है, वरना वह इस संसार में आकर मोहमाया के चक्कर में पड़ जाता है। अत: मनुष्य को समय निकालकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। बच्चों को संस्कारवान बनाकर सत्संग कथा के लिए प्रेरित करें। भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला के दर्शन करने के लिए भगवान शिवजी को गोपी का रूप धारण करना पड़ा। आज हमारे यहां भागवत रूपी रास चलता है, परंतु मनुष्य दर्शन करने को नहीं आते। इस दौरान समिति के अजय सिंह, डॉ. मिथिलेश, दिग्विजय राय, अवधेश सैनी, बबलू यादव, मनोज कुमार, राजहंस कन्नौजिया आदि शामिल रहे।
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