मऊ। मंगलवार की सुबह जिले के विभिन्न इलाकों में आई आंधी और बारिश ने एक बार फिर किसानों की कमर तोड़ दी है। लगभग आधा घंटे तक तेज बारिश होने के चलते खेत खलिहान में मड़ाई के लिए रखे गए गेहूं के बोझ पूरी तरह भीग गए हैं। किसान भीगे बोझ को अभी किसी तरह सूखाकर मड़ाई कर ही रहे थे कि प्रकृति ने उनके सपने पर पानी फेर दिया। एक हफ्ते तक कटाई मड़ाई बाधित हो गई है।
तीन दिन के अंदर दूसरी बार आंधी और बारिश से किसान चिंतित हैं। मंगलवार को तड़के लगभग छह बजे शुरू हुई बारिश आधा घंटे तक हुई। इसके बाद रुक-रुक कर बारिश होती रही। खेतों में पानी लग जाने से काटकर छोड़ी गई फसल के नुकसान होने का खतरा बढ़ गया है। मौसम परिवर्तन से किसानों के होश ही उड़ गए हैं। खेतों में काटकर छोड़ी गई फसल तथा एकत्र कर रखे गए बोझ के भीग जाने से लोगों को नुकसान होने का डर सताने लगा है। खेत खलिहान में मड़ाई कर रखा गया भूसा आंधी में उड़ गया। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो तिलहन की फसल में माहो का प्रकोप बढ़ेगा। साथ ही गेहूं की फसल भीगने से दाने की चमक गायब होगी। अधिकांश गांवों मेेें नाम मात्र ही कटाई मड़ाई का काम हो पाया है। गत आठ अप्रैल को हुई बारिश के बाद मौसम साफ होने से किसान मड़ाई कार्य में लगे ही थे कि बारिश ने किसानों के मेहनत पर पानी फेर दिया। किसान खेतों व खलिहान में नुकसान हो रही फसल को सिर्फ निहार रहे हैं। किसानों का कहना था कि प्रकृति के तेवर को देखकर लगता है कि फसल का घर जाना मुश्किल ही लग रहा है। पिपरीडीह संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में मंगलवार को सुबह हुई बारिश से खेत खलिहान में रखे गेहूं का बोझ तथा काटकर छोड़ी गई फसल भीग जाने से किसानों की नींद उड़ गई है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार का कहना है कि फसल के बार-बार भीग जाने से बाजार रेट कम होगा। गेहूं में नमी होने की स्थिति में अंकुरण होने लगेगा। किसानों को गेहूं को पूरी तरह सूखाकर और दवाओं को रखकर ही भंडारण करना चाहिए।