दोहरीघाट में सरयू नदी के किनारे पर कटान से बचाने के लिए डाले गए वोल्डर से टकरातीं सरयू नदी की
मऊ। सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के बाद रविवार को पांच सेंटीमीटर घटा, लेकिन जलस्तर में उतार-चढ़ाव के साथ कटान का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है। जिले में सरयू की कटान रोकने के लिए पिछले पांच वर्षों में प्रशासन की ओर से करीब 77 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
इसके बावजूद 2 हजार एकड़ से ज्यादा कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। अकेले मधुबन तहसील के धर्मपुर विशुनपुर में पिछले 15 दिनों में 20 बीघा से अधिक जमीन कटान की भेंट चढ़ चुकी है। आंकड़ों के मुताबिक सरयू के कटान से बचाव के लिए वर्ष 2022-23 में 16 करोड़ रुपये, वर्ष 2023-24 में 13 करोड़ रुपये, वर्ष 2024-25 में 13.34 करोड़ रुपये, वर्ष 2025-26 में 29.55 करोड़ रुपये और वर्ष 2026-27 में सात करोड़ रुपये खर्च किए गए।
इसके बावजूद कटान पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो सका है। धर्मपुर विशुनपुर में रोजाना लगभग एक बीघा जमीन कटान की चपेट में जा रही है। दोहरीघाट की ऐतिहासिक धरोहरों पर मंडरा रहा खतरा: सरयू की कटान का खतरा अब दोहरीघाट कस्बे पर भी मंडरा रहा है।
नदी की तेज लहरें ऐतिहासिक रामघाट, भारत माता मंदिर और मुक्तिधाम की ओर लगातार टकरा रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार वर्ष 1988 से सरयू की धारा दोहरीघाट कस्बे की ओर बढ़ रही है। नदी की धारा पहले ही गौरीशंकर घाट की प्राचीन धरोहर को अपने आगोश में ले चुकी है।
इसके अलावा कई धार्मिक, राजनीतिक और ऐतिहासिक स्थल भी कटान के कारण अस्तित्व खो चुके हैं। वर्ष 1992 में प्राचीन मंदिर रामायण भवन, सत्संग भवन, खाकी बाबा की कुटी और श्मशान घाट का विश्राम कक्ष भी नदी की धारा में समा गया था।