मधुबन। तहसील क्षेत्र के कटघरा शंकर के पास ताल रतोय रौजा के किनारे मौजूद मीरा शाह की मजार पर रविवार को मेला लगेगा। जिसमें मीरा शाह से जुड़े हजारो अकीदतमंद मेले में शिरकत करेंगे, और मजार पर मत्था टेककर दुआएं मांगेगे। रविवार को लगने वाले मेले की तैयारी शनिवार को पूरी कर ली गई है। मेले में मऊ के साथ साथ बलिया, गाजीपुर, आजमगढ़ और देवरिया जिले सेे श्रद्घालुओं का जत्था पहुंचेगा। इसमें मुस्लिम समुदाय के साथ साथ हिंदू समुदाय के लोग भी भाग लेते हैं। यह मेला प्रत्येक वर्ष ईद के अगले दिन लगता है।
बताते चले मीरा शाह सूफी संत थे। मुगल शासन काल के दौरान मीरा शाह भारत का भ्रमण करते हुए कटघराशंकर पहुंचे थे, और सुनसान जगह पर ताल रतोय के किनारे अपना आशियाना बनाकर रहने लगे। वैसे तो उनके बारे में तमाम किवंदन्ति है ,लेकिन उसमें कुछ ऐसी भी है जो काफी चर्चा में रहती है और अकीदतमंद उसी आस्था एवं विश्वास से जुड़कर हजारों की संख्या में लोग आते है और श्रद्धा से मत्था टेकते है। बताते है कि एक बार ताल के किनारे बसे मछुवारों से मीरा शाह ने मछली मांग दी। लेकिन मछुवारों ने मछली देने से इंकार कर दिया।नतीजा यह हुआ कि ताल से मछली ही गायब हो गई। जिस ताल से मछुवारों का साल भर मछली बेचकर रोटी चलता था। हफ़्तों तक मछली नही मिलने से मछुवारे परेशान हो गए तब जाकर मीरा शाह की शरण मे गए और हर साल मछली चढ़ाने का वादा किए तबसे मछलियां फिर से मिलने लगी। इसके बाद मछुवारे प्रत्येक वर्ष मीरा शाह को मछली चढ़ाना नही भूलते। एक हिंदू महिला को बच्चे नही हो रहे थे,उसने मीरा शाह की शरण ली।मीरा शाह की दुआ से उसे बच्चा हुआ। लेकिन मीरा शाह के बताए अनुसार वह लड़का बारहवें वर्ष में लाख प्रयासों के बाद भी नही बच पाया। जिसकी समाधि मीरा शाह के बगल में आज भी मौजूद है। इसी उपलक्ष्य में ईद के दूसरे दिन यहां भारी मेला लगता है। जिसमें अकीदतमंद मजार पर मत्था टेंकने के बाद मेले का भी लुत्फ उठाते है।