रतनपुरा। हलधरपुर थाना क्षेत्र के रतनपुरा बाजार निवासी और हार्डवेयर के व्यापारी अरुण कुमार गुप्ता को जेल से मिली धमकी की घटना को पुलिस ने गंभीरता से लिया। इस दौरान पुलिस पीड़ित व्यापारी से तहरीर लेकर सरायलखंसी थाने में रिपोर्ट दर्ज की। इसमें एक एक व्यक्ति को आरोपित किया गया है। लेकिन कार्रवाई के नाम पर पुलिस कोई कार्रवाई करने में सफल नहीं है। दूसरी तरफ धमकी मिलने के बाद से व्यापारी का परिवार काफी सहमा हुआ है।
व्यापारी अरुण कुमार गुप्ता हलधरपुर थाने के रतनपुरा बाजार के निवासी है। शुक्रवार की दोपहर को अरुण कुमार गुप्ता की मोबाइल पर एक व्यक्ति ने फोन किया, फोन करने वाले ने खुद को रवि सिंह बताया, साथ ही बोला कि मैं जिला जेल से बोल रहा हूं। चेतावनी देते हुए अरुण गुप्ता से कहा कि गरथौली गांव निवासी मेवालाल एवं रतनपुरा निवासी कृष्ण मोहन सिंह के मध्य चल रहे लेन-देन के विवाद से अलग हो जाओ ,वरना इसका बुरा अंजाम तुम्हें भुगतना पड़ेगा। उसने यह भी कहा कि मेवालाल के जो भी कागजात तुम्हारे पास हैं, उन्हें वापस कर दो। मैं मेवालाल को दो-चार लड़कों के साथ तुम्हारी दुकान पर भेज दूंगा। चेताया यदि तुमने ऐसा नहीं किया तो परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना। फोन सुनते ही व्यापारी सहम गया। व्यपारी ने फोन से मिली धमकी को गंभीरता से लेते हुए तुरंत स्थानीय चौकी प्रभारी को इससे अवगत कराया। साथ ही धमकी की रिकॉर्डिंग भी चौकी प्रभारी रतनपुरा को उपलब्ध करा दिया। व्यापारी अरुण कुमार गुप्ता की तहरीर पर गरथौली निवासी मेवालाल पुत्र जियावन राजभर के विरुद्ध थाना सराय लखनंसी के खिलाफ रिपोर्ट शनिवार को दर्ज करा दी है। बताते चले अरुण की तहरीर पर पुलिस ने मेवालाल के विरूद्घ पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज किया। नामजद मेवालाल सरायलखंसी थाना क्षेत्र के गरथौली गांव के निवासी है। व्यापारी नेताओं ने संपूर्ण प्रकरण की जांच कर निष्पक्ष दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही के लिए आवाज बुलंद की है।
क्या है मामला
रतनपुुरा। गरथौली गांव निवासी मेवालाल राजभर से रतनपुरा निवासी कृष्णमोहन सिंह ने एक जमीन तय किया था, इस सौदे में कृष्ण मोहन ने मेवालाल को दो लाख रुपये एडवांस दिया है। तय समय पर जमीन की रजिष्ट्री के लिए जब मेवालाल रजिस्ट्री दफ्तर आया तो वहां डेढ़ लाख रुपये के स्टैंप पेपर खरीदे गए।इसी बीच विक्रेता लापता हो गया। जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले दिन भर उसकी तलाश करके वैरंग वापस चले गए। बाद में कृष्णमोहन सिंह अपने रुपये वापस मांगने लगे तो मेवालाल ने उन्हें चेक पकड़ा दिया। कृष्णमोहन सिंह अरुण की दुकान पर उठते बैठते हैं,इस चेक को कृष्णमोहन सिंह ने अरुण कुमार को देते हुए कहा कि जरा बैंक से पता कर लीजिए कि यह चेक फर्जी तो नहीं है। अरुण ने बैंक में जाकर पता किया तो चेक पर किया गया मेवालाल का हस्ताक्षर मैच नहीं कर रहा था। यह बात अरुण ने कृष्ण मोहन को बता दी। यह जानकारी होने पर मेवालाल अरुण से चेक वापस मांगने गया तो अरुण ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि चेक कृष्णमोहन सिंह ने दिया है मैं उन्हें ही यह चेक वापस करूंगा। इसके बाद अरुण को जेल से धमकी दी गई।