मऊ। जीएसटी लागू होने के सात माह बाद भी तकनीकी खामियों को दुरुस्त नहीं किया जा सका है। जीएसटी पोर्टल की स्पीड स्लो होने से व्यापारियों को ईवे बिल में व्यापारियों और उद्यमियों को तमाम समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। लोगों ने आला अधिकारियों को शिकायती पत्र दिया लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं किया जा सका है।
जीएसटी लागू होने के बाद जिले के व्यापारियों ने नियमों के तहत व्यापार तो शुरू कर दिया लेकिन उन्हें इसकी खामियों से होने वाली परेशानियों से मुक्ति अभी तक नहीं मिल सकी। एक राज्य से दूसरे राज्य में माल भेजने से पहले उसका ऑनलाइन पंजीकरण कराना जरूरी होता है। जीएसटी पोर्टल की स्पीड स्लो होने से व्यापारियों और उद्यमियों को ई वे बिल में आ रही तकनीकी समस्याओं से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं व्यापारियों को दोहरा ईवे बिल की समस्या से जूझना पड़ रहा है। इस संबंध में उद्यमी सुशील अग्रवाल का कहना है कि जीएसटी पोर्टल की स्पीड स्लो है। सभी व्यापारियों के पास संसाधन नहीं है। ऐसे में ईवे बिल के चलते काफी दिक्कत आ रही है। कंपोजिट स्कीम के तहत डेढ़ करोड़ टर्न ओवर तक के व्यापारियों को ईवे बिल से छूट दी जाए। इसी क्रम में उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिला महामंत्री गोपाल कृष्ण बरनवाल का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद भी तकनीकी समस्या से जूझना पड़ रहा है। सरकार की तरफ से व्यापारियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाए। जीएसटी विशेषज्ञ तथा अधिवक्ता प्रयाग वर्मा का कहना है कि दोहरा ईवे बिल की समस्या से व्यापारियों और कारोबारियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में वन ईवे बिल लागू किया जाना चाहिए।