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बच्चों को ड्रेस मिलने का इंतजार

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मऊ। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा सत्र का पांचवां माह बीतने को है, लेकिन अभी भी सभी बच्चों को ड्रेस नहीं मिल सका है। अगर सरकारी दावों पर यकीन करें तो भी जनपद के 15 फीसदी बच्चों को नि:शुल्क ड्रेस मिलने का इंतजार है। जबकि हकीकत इससे भिन्न है। उधर अधिकारी देर से धन मिलना तथा कपड़ा व्यवसायियों की हड़ताल को देरी की वजह बता रहे हैं।
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सरकारी विद्यालयों में बच्चों के शत प्रतिशत नामांकन, ठहराव आदि के लिए सरकार की तरफ से बच्चों को नि:शुल्क दो सेट यूनिफार्म देने की व्यवस्था है। विभाग की तरफ से 1.95 लाख छात्रों को दो सेट नि:शुल्क ड्रेस का लाभ दिया जाना है। अभी अगस्त माह बीतने को है, लेकिन विभाग की तरफ से शत प्रतिशत ड्रेस वितरण पूरा नहीं किया जा सका है। परदहां ब्लाक क्षेत्र में अभी 50 प्रतिशत ही ड्रेस का वितरण हो पाया है। जबकि दोहरीघाट ब्लाक के कई विद्यालय शिक्षामित्र के भरोसे चलने से तकनीकी अड़चन के चलते ड्रेस बांटने में समस्या आ रही है। यह तो एक बानगी है। अधिकारी 85 प्रतिशत ड्रेस वितरण होने का दावा कर रहे हैं। जबकि हकीकत कुछ और ही है। खंड शिक्षा अधिकारी खाते में देर से धन मिलना तथा जीएसटी के विरोध में कपड़ा व्यवसायियों की हड़ताल की बात कह रहे हैं। इस बाबत नि:शुल्क ड्रेस योजना के नोडल अधिकारी तथा जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता योगेंद्र यादव का कहना है कि लगभग 85 प्रतिशत विद्यालयों में ड्रेस वितरित कर दिया गया है। शीघ्र ही बाकी ड्रेस वितरित कर दिया जाएगा।
इनसेट
कितने विद्यालय हैं
जिले में 1060 प्राथमिक, 442 उच्च प्राथमिक, 94 सहायता प्राप्त, 56 समाज कल्याण से संचालित हैं। इसके अलावा 67 माध्यमिक विद्यालय हैं। गौरतलब है कि ड्रेस इसी माह तक वितरित कर देना है।
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