मऊ। जिले की नहरों में दो दिन पहले पानी तो छोड़ा गया लेकिन इनमें इतना कम पानी है कि यह कुलाबों तक भी नहीं पहुंच पा रहा है। तो फिर खेतों में पहुंचने की तो कल्पना भी नहीं की जा सकती है। किसान इसे महज खानापूरी ही मान रहे हैं। नहर के आस पास वाले गांवों के किसानों की धान की नर्सरी इस समय लगभग तैयार है। बहुत से किसानों ने अपने खेतों में संडा लगाने की तैयारी कर रखी है। लेकिन नहरों में काफी कम पानी होने से उन्हें निराशा हो रही है।
जिले में प्रमुख रूप से दो नहरों के पानी से जिले के 3860 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि की सिंचाई होती है। इसमें एक शारदा सहायक और दूसरी दोहरीघाट पंप कैनाल से। शारदा सहायक नहर का पानी मादी सिपाह , सियरही बरजला ,कुसुम्हा होते हुए घोसी, भरौली ,लैरो दोनवार इंदारा होते हुए रतनपुरा से आगे बलिया जनपद के गांवों तक विभिन्न माइनरों के माध्यम से जाता है। जबकि दोहरीघाट पंप कैनाल का पानी दोहरीघाट से लेकर मधुबन और घोसी तहसील के सैकड़ों गांवों के क्षेत्रफल को सिंचित करता हुआ बरौली के बाद बलिया जनपद की सीमा में चला जाता है। इन दोनों नहरों में महीनों से पानी नहीं आ रहा था। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना था कि नहरों की सिल्ट सफाई और पंपों की मरम्मत के चलते नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। 13 जून को सिंचाई विभाग द्वारा मुख्य नहर में पानी छोड़ने का आश्वासन दिया गया था। नहर में पानी उस दिन नहीं छोड़ा गया बल्कि अगले दिन 14 जून को छोड़ा गया लेकिन दोहरीघाट पंप कैनाल से महज तीन पंप ही चलाए जा सके। लेकिन किन्हीं गड़बड़ियों की वजह से 15 जून को ये तीनों पंप बंद हो गए। 16 जून को फिर से प्रयास करके किसी प्रकार पांच पंपों को चालू किया जा सका। लेकिन इनसे काफी कम मात्रा में नहर में पानी पहुंच पा रहा है। इस बाबत अधिशासी अभियंता सिंचाई अशोक कुमार का कहना है कि अगर जरूरत हुई तो अगले दिन से आठ पंपों को चालू करके पानी की मात्रा बढ़ाई जाएगी। पंपों की मरम्मत कर ली गई है। नहरों में पानी की कमी नहीं होने दी जाएगी।