मऊ। एआरटीओ आरएएस यादव की गिरफ्तारी से हर जिले में हड़कंप मचा है। इससे जिले का एआरटीओ कार्यालय अछूता नहीं है। विभाग में आरएस यादव की चर्चा के साथ होने वाली कार्रवाई के प्रति सजगता के साथ कर्मचारियों में खौफ व्याप्त है। फिलहाल आरएस यादव के विरुद्घ हुई कार्रवाई से एआरटीओ कार्यालय में थोड़ी सतर्कता बरती जा रही है। मगर यहां भी भ्रष्टाचार की जड़े काफी गहरी हैं, जिन्हें ठीक करना अभी भी इतना आसान नहीं है। सबके बाद बिना दलाल के एआरटीओं दफ्तर पर कोई काम कराना मुमकिन नहीं है। दलाल नहीं तो फिर एजेंसियों से सीधी सेटिंग होने से से यहां के भी अधिकारी कर्मचारी मालामाल हो रहे हैं। यह अलग बात है कि वह आज के समय में सख्ती एवं आनलाइन का हवाला देकर सब कुछ पारदर्शिता का राग अलाप रहे हैं। लेकिन अभी भी बिना दलालों के यहां कुछ काम होना संभव नहीं है।
जिले में एआरटीओ विभाग काफी मालदार विभाग माना जाता है। चाहे नई गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन का काम हो या फिर डीएल बनवाने से लेकर वाहनों को पकड़ने एवं छुड़ाने से लेकर ओवरलोडिंग का। सड़क पर गाड़ी भले ही किसी की चलती हो लेकिन मालवाहन, सवारी वाहन से लेकर अन्य कई प्रकार के वाहनों पर चलती एआरटीओ विभाग की ही है। पिछले कुछ सालों से आनलाइन व्यवस्था के बाद सीधे तौर पर तो कुछ भ्रष्टाचार में कमी कहीं जा सकती है लेकिन अभी भी सेटिंग का काम जारी है। पूर्व में वीआईपी नंबरों को लेर काफी लूट होती थी, लेकिन कुछ समय से ऑनलाइन आवेदन एवं नंबर लेने की सुविधा के चलते इस पर अंकुश लग गया है लेकिन यहां सब कुछ ठीक ठाक चलता हो यह बात अभी भी किसी को हजम नहीं होती है। आरटीओ एसएस यादव की गिरफ्तारी के बाद यहां भी सभी के हाथ पांव फुले हुए हैं। एआरटीओ श्यामलाल का कहना है कि कार्यालय में दलालों के प्रवेश पर पूरी तरह अंकुश लगाकर बोर्ड चस्पा करा दिया गया है। कोई भी अपना काम सीधे बिना सुविधा शुल्क के सरकारी फीस जमा करके करा सकता है।