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राजकीय नलकूपों की नालियां क्षतिग्रस्त

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मऊ। जनपद में राजकीय नलकूपों के संचालन की स्थिति ठीक नहीं है। अधिकांश नलकूपों की नालियां जर्जर हाल में है। ऐसे में दूर वाले खेतों में पानी नहीं पहुंच पा रहा। इसे लेकर किसान परेशान हैं। सरकारी आंकड़ों में मात्र छह राजकीय नलकूप खराब दिखाए गए हैं। महकमे के आला अधिकारी धन न होने का रोना रो रहे हैं। सिंचाई व्यवस्था को चुस्त करने के लिए शासन की ओर से 347 नलकूपों की स्थापना की गई है। लेकिन लचर कार्यप्रणाली के चलते किसानों को इन नलकूपों का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा। दूर वाले खेतों में पानी ही नहीं पहुंच पा रहा। किसान निजी संसाधनों से सिंचाई कर रहे। अगेती धान की नर्सरी तैयार हैं, ऐसे में सिंचाई की सख्त जरूरत है। लेकिन नलकूपों का रख रखाव सही न होने तथा नालियां जर्जर और क्षतिग्रस्त होने से किसान परेशान हो रहे। विभाग की माने तो छह राजकीय नलकूप बिगड़े हैं। अधिकारियों का कहना है कि एक नलकूप के अनुरक्षण पर 12 हजार रुपए ही मिलते हैं। किसान संजय कुमार सिंह, किसान नेता देव प्रकाश राय, सूर्यभान शर्मा, जर्नादन यादव, रविंद्र यादव ने कहा कि लो वोल्टेज के चलते नलकूप का संचालन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। नलकूपों की नालियां दशकों पूर्व बनी है। नालियों के पुनर्निर्माण के लिए कई बार आला अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया लेकिन आश्वासन के सिवाय कुछ भी हासिल नहीं हो सका है। बोझी बाजार : बड़रांव ब्लाक क्षेत्र के अधिकांश राजकीय नलकूपों की नालियां क्षतिग्रस्त हैं। इसके चलते पानी इधर उधर बहते रहने से दूर वाले खेतों में पानी ही नहीं पहुंच पा रहा है।
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इस बाबत नलकूप विभाग के अधिशासी अभियंता अच्युतानंद का कहना था कि सीमित संसाधनों से काम चलाया जा रहा है। सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास जारी है। बजट की मांग की गई है। बिगड़े पड़े नलकूपों की मरम्मत शीघ्र करा दी जाएगी।
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