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स्टेशन पर टिकट दलालों का वर्चस्व

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रेलवे स्टेशन पर तत्काल टिकट के दौरान दलालों का वर्चस्व कायम है। आए दिन टिकट दलाल अपने आदमियों को नाम बदल कर एक दिन पूर्व ही नंबर लगवा देते हैं। इससे उनके आदमी खिड़की खुलते ही लाइन मेें लगकर टिकट ले लेते हैं। दलालों की सक्रियता से दूसरे यात्रियों को टिकट नहीं मिल पाता है। जबकि तत्काल टिकट को लेकर आए दिन स्टेशन पर विवाद होता रहता है।
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वर्तमान में रेलवे स्टेशन पर दलालों की सक्रियता होने के चलते लोगों को टिकट नहीं मिल पा रहा है। जबकि दलाल रेलवे कर्मचारियों से सांठ गांठ कर तत्काल टिकट के लिए पूर्व में लाइन लगवाकर असानी से टिकट प्राप्त कर ले रहे हैं। उधर गर्मी की छुट्टी में लोग अपने परिजनों के साथ जाने के लिए लोगों को जहां टिकट नहीं मिलने से परेशान है। मजबूरन लोगों को प्राइवेट में टिकट कराने को मजबूर हो रहे है। सबसे ज्यादा समस्या तहसील के दूर दराज गांवों से आने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है। जहां टिकट की चाह में लोग रात से स्टेशन पर आकर सुबह टिकट खिड़की पर लाइन लगाते है। लेकिन सांठ गांठ और सीट कम होने के चलते उन्हें टिकट नहीं मिल पा रहा है। जबकि मई-जून एवं जुलाई के महीने में शादी विवाह एवं मांगलिक कार्यक्रम होते हैं तथा लोग ट्रेनों से किस स्थान से दूसरे स्थान पर आते हुए जाते हैं । स्टेशन से टिकट न मिलने पर मजबूरन लोग दलालों के हाथों से टिकट लेने को मजबूर हैं । इस बाबत व्यापारियों ने मांग किया है कि प्रत्येक दिन रेलवे पुलिस की तैनाती एवं छापामारी अभियान किया जाए जिससे दलालों पर रोक लग सके।इस संबंध में जन संपर्क अधिकारी अशोक कुमार का कहना है कि सतर्कता अधिकारियों का दल आकस्मिक चेकिंग करता रहता है। दलालों का वर्चस्व कदापि सहन नहीं किया जाएगा। ऐसी शिकायत मिलने पर जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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