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राम के बल पर ही हनुमान जी ने किया काम

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कुसुम्हां। क्षेत्र के कुसुम्हां बाजार में दुर्गा मंदिर के प्रांगण में चल रही पांच दिवसीय राम कथा के दूसरे दिन आजमगढ़ की धरती से पधारे मानस मर्मज्ञ पं. बाल गोविंद शास्त्री ने कहा कि राम नाम की महिमा राम चरित्र मानस में मात्र दो लोग ही कर सके। एक पहला भरत और दूसरा हनुमान। जब लक्षमण को शक्ति लगने पर हनुमानजी संजीवनी बूटी लेकर अयोध्या के ऊपर से आ रहे थे। राम राम के बल पर ही हनुमान जी ने सब काम किया। इतना अच्छा काम करने के बाद भी भगवान राम ने हनुमान को कभी ऊंचा पद नहीं दिया। रामचंद्र जी के बार-बार कहने पर तुम मम प्रिय भरतही संभायी। हमेशा हनुमान को भरत के बराबर ही मानते रहे हैं।
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हनुमान के मन में भरत को तौलने का विचार आया जिसपर हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर अयोध्या के रास्ते से जाते वक्त भरत नंदी ग्राम में तपस्या कर रहे थे। अयोध्या की सुरक्षा के लिए हनुमान को बिना नोक के बाण से मार गिरायां राम के बल पर। हनुमान जी बेहोश हो गए और बाण पर ही संजीवनी बूटी का पहाड़ ऊपर रुक गया। यह राम का का प्रताप था। जिसका प्रयोग भरत ने किया। भरत जी ने राम-राम रटहीदिन राती। भरत और हनुमान जो भी थे वह केवल राम-राम करने के बल पर ही कोई भी असंभव कार्य संभव किया करते थे। राम कथा शुरू होने के पहले भजन के माध्यम से राम कथा की शमा बांध दिया । इस दौरान रामसरन दास, ग्राम प्रधान कुसुम्हां रामबचन यादव आदि ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग दिया।
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