जिले में हादसों के बाद भी परिवहन विभाग सबक नहीं ले रहा। यातायात नियमों और तय मानकों को ताक पर रखकर सड़कों पर स्कूली वाहन फर्राटा भर रहे हैं। कहने को तो आरटीओ से स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने के लिए केवल 265 स्कूली वाहनों को परमिट दिया गया है। लेकिन बसों के अलावा अन्य वाहनों से बच्चे ढोए न जा रहे हैं। पांच लोगों की क्षमता वाले टेंपो में बच्चों को ठूसकर बैठाया जाता है। सब कुछ जानते हुए अधिकारी मौन हैं।
जिले में निजी इंग्लिश स्कूलों की संख्या 535 है। इसमें से 23 विद्यालय सीबीएसई से संचालित हैं। आरटीओ में 265 स्कूली वाहनों का पंजीकरण किया गया है। ये वाहन मानक को पूरा करने के बाद पंजीकृत किए गए हैं। लेकिन इसके इतर कई ऐसे विद्यालय हैं जिनके पास स्कूली बस नहीं हैं। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों को निजी सवारी वाहनों से स्कूल भेजते हैं। ये वाहन मानक को पूरा नहीं करते। पुलिस तथा संभागीय परिवहन विभाग की तरफ से कार्रवाई में सिर्फ खानापूर्ति ही होती है। रतनपुरा : बाजार सहित क्षेत्र के विभिन्न इलाकों के बाजारों के प्रमुख मार्गो पर नियम कानून को ताक पर रखकर ओवरलोड स्कूली वाहन संचालित हो रहे हैं। वाहन चालक टेंपो में15 से 20 बच्चों को बैठाकर बेखौफ चला रहे हैं। कई बार हादसा होने के बाद भी विभाग लापरवाह बना है।
27 सितंबर 2018 को स्कूली वाहन आटो चालक को अनियंत्रित बस ने धक्का दे दिया था इस दुर्घटना में पांच बच्चे घायल हो गए थे। घटना के बाद संभागीय परिवहन निगम तथा पुलिस प्रशासन की नींद टूटी। कई दिनों तक अभियान चला, लेकिन तय मानकों को ताक पर रखकर स्कूली वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। संभागीय परिवहन अधिकारी की मानें तो हर माह लगभग 80-85 स्कूली वाहनों का चालान किया जाता है। स्कूल प्रशासन का दावा है कि मानक के अनुरुप ही स्कूल बसों को चलवाया जा रहा है।
कोट
265 स्कूली वाहनों का पंजीकरण किया गया है। मानक के विपरीत चलने वाले 80 से 85 स्कूली वाहनों पर कार्रवाई की जाती है।
अवधेश कुमार, एआरटीओ