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जांच में दोषी पाए गए फिर भी कार्रवाई नहीं

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मऊ। खाद्य एवं रसद विभाग में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। उच्चाधिकारियों की जांच रिपोर्ट में दोषी करार दिए जाने के बाद विभाग के तत्कालीन निरीक्षक और वर्तमान कई लिपिकों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे शिकायत कर्ताओं का मनोबल टूट रहा है। लोगों का जनसुनवाई पोर्टल से लेकर उच्चाधिकारियों और मुुख्यमंत्री तक से की गई शिकायतों पर कोई कार्रवाई न किए जाने से भरोसा टूट रहा है। जांच अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की संस्तुुति के बाद फिर से परीक्षण कराने और पत्रावलियों को प्रस्तुत किए जाने के आदेश देकर शिकायतों को लंबित किए जाने का खेल चल रहा है।
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नगर के वार्ड संख्या छह के सभासद दिनेश कुमार सिंह ने प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद विभाग को क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी मनोज कुमार सिंह, पूर्ति निरीक्षक हर्षिता राय, लिपिक धीरज अग्रवाल और अरविंद कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार और अनियमितता की शिकायत 16 मई 2018 को किया था। शासन के निर्देश पर उपायुक्त खाद्य एवं रसद वाराणसी पार्थ अच्युत ने इन आरोपियों पर लगे आरोपों की जांच की। 17 जुलाई 2018 को उन्होंने सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में तीनों लिपिकों को दोषी करार देते हुए उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति किया। इसके मद्देनजर अपर आयुक्त खाद्य एवं रसद अनूप शंकर ने 13 नवंबर 2018 को दिए गए अपने आदेश में तीनों लिपिकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने को कहा। लेकिन डेढ़ माह बाद भी आरोपियों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। सभासद दिनेश कुमार सिंह ने जांच अधिकारी की रिपोर्ट और उच्चाधिकारियों की कार्रवाई की संस्तुति का हवाला देते हुए जिलाधिकारी को पांच नवंबर को पुन: प्रार्थना पत्र दिया। जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी से फिर से इन शिकायतों का परीक्षण करके पत्रावली प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है। इस बाबत एडीएम डीपीपाल का कहना है कि पत्रावली के तथ्यों का अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद पत्रावली जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी। उधर शिकायत कर्ता का कहना है कि उच्चाधिकारियों के स्पष्ट आदेश के बाद लिपिकों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, उल्टे इन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है। इनका कहना है कि दागियों में दो 10 साल और एक सात साल से अधिक समय से यहीं तैनात है। इन पर सरकार की तबादला नीति का असर नही पड़ता है।
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