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95 फीसदी विद्यालयों में बिजली नहीं

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मऊ। नई सरकार के गठन के तीन माह बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के कार्य प्रणाली में सुधार या बदलाव होता नजर नहीं आ रहा है। नया शैक्षणिक सत्र एक जुलाई से शुरू हो रहा है, लेकिन विभागीय तैयारी आधी अधूरी ही नजर आ रही है। अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं को बहाल तक नहीं किया जा सका है। शौचालय उपयोग करने लायक ही नहीं है। बिजली व पेयजल की स्थिति भी ठीक नहीं है। हालांकि कागज में सब कुछ दुरुस्त बता दिया गया है।
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जिले में 1060 प्राथमिक तथा 442 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। आरटीई के तहत सभी स्कूलों में बिजली, पेयजल सहित विभिन्न सुविधाओं को बहाल करने का प्रावधान है, लेकिन शिक्षा सत्र का तीन माह बीत गया अभी तक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने में विभागीय अधिकारियों ने रुचि लेने की जहमत तक नहीं उठाई है। रतनपुरा ब्लाक क्षेत्र के गाढ़ा स्थित परिषदीय विद्यालय, खरगजेपुर स्थित परिषदीय के परिसर में हैंडपंप तो लगा है, लेकिन महीनों से प्रदूषित पानी उगल रहा है। यह तो एक बानगी है। विद्यालयों में खराब पड़े हैंडपंपों को चिंहित नहीं किया जा सका है। यही हाल बिजली की है। 95 प्रतिशत विद्यालयों में बिजली की सुविधा ही नहीं है। कुछ विद्यालयों में बिजली है भी तो प्रधानाध्यापक चोरी होने के डर से पंखा घर पर रखे हैं। इससे बच्चों को गर्मी व उमस के बीच पढ़ाई करना पड़ता है। यही नहीं अधिकांश विद्यालयों में बने शौचालय अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। शौचालयों की सफाई तथा पानी की समुचित व्यवस्था न होने से ताला ही लटका रहता है। ऐसे में बालिकाओं को बाहर जांना पड़ता है। प्रत्येक स्कूलों में महकमे की ओर से मेंटीनेंस के नाम पर पांच हजार से सात हजार रुपये तक दिया जाता है। लेकिन सब कागज में ही खर्च कर दिया जाता है। महकमे के आला अधिकारियों द्वारा प्रतिवर्ष निरीक्षण भी किया जाता है, लेकिन रिपोर्ट ओके दिखा दी जाती है।
रंग-रोगन तक नहीं हुआ विद्यालयों में
मऊ। अभिभावकों तथा बच्चों को आकर्षित करने के लिए जिले के निजी विद्यालयों के परिवेश को आकर्षक बना दिया गया है। जबकि शिक्षा सत्र का तीसरा माह बीतने को है परिषदीय विद्यालयों की रंगाई पोताई तक नहीं कराया जा सका है। हेडमास्टरों द्वारा बजट का रोना रोया जा रहा है।
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नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों का पता नहीं
मऊ। परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत सभी बच्चों को शासन की तरफ से नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक वितरित करने का प्रावधान है। शिक्षा सत्र शुरू हुए तीन माह बीत गए मगर अभी तक नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकों का अता पता नहीं है। विभागीय अधिकारियों द्वारा जून माह तक नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक आ जाने का दावा किया जा रहा है।
गड़बड़ी मिलने पर होगी कार्रवाई: एडी बेसिक
मऊ। जन समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए सरकार की तरफ से जिलास्तरीय अधिकारियों की 24 घंटे जवाबदेही तय की गई है। परिषदीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं के बहाल करने के मामले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश कुमार के सीयूजी मोबाइल नंबर पर कई बार कॉल किया गया लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। वहीं एडी बेसिक आजमगढ़ मंडल डॉ. नंदलाल सिंह का कहना है कि शिक्षा सत्र शुरू होने से पूर्व परिषदीय विद्यालयों में सुविधाएं बहाल करने के लिए बीएसए को निर्देश दिया गया है। समीक्षा बैठक मेें गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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