नवंबर 2016 से सात फरवरी 2017 तक महज आठ फीसदी धान की खरीद हुई थी। लेकिन सात फरवरी से 20 फरवरी तक 42 प्रतिशत धान खरीद लिया गया। ऐसे समय में जब सारे कर्मचारी चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त हैं तो 34 फीसदी धान कैसे खरीद लिया गया। आनन फानन की गई 34 फीसदी धान खरीद किसानों से न कर व्यापारियों से की गई है।
जिले में इस वर्ष के लिए धान खरीद का लक्ष्य 42200 मीट्रिक टन रखा गया है। यह धान खरीद पहली नवंबर से 28 फरवरी तक की जानी थी। लेकिन जिले में धान खरीद शुरू से ही काफी धीमी गति से की गई। इसका नतीजा रहा कि सात फरवरी तक महज 3393 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई। यह खरीद लक्ष्य का महज आठ प्रतिशत है। इसके बाद चुनावी प्रक्रिया में तेजी आ गई और धान की खरीद मात्र औपचारिकता भर रह गई। इसका नतीजा रहा कि किसानों को धान बेंचने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। किसानों को अपने मोटी प्रजातियों के धान नौ से दस रुपये किलो और महीन प्रजाति के धान 11 से 12 रुपये किलो की दर से बेंचना पड़ा। चूंकि यह समय शादी विवाह और रबी फसल की बुआई का था इसलिए किसानों को मजबूरी में अपने धान औने पौने भावों पर बेंचना पड़ा। यदि सरकारी धान खरीद केंद्रों पर यही धान 1470 से 1510 रुपये प्रति कुंतल में किसानों से खरीदे जाते। लेकिन आठ फरवरी से 21 फरवरी तक की महज 14 दिनों की अवधि में 17000 मीट्रिकटन धान की खरीद कर ली गई। यह लक्ष्य का 42 प्रतिशत है।
किसानों की शिकायत है कि दो हफ्तों में जो धान की खरीद की गई है वह केवल व्यापारियों से की गई है। किसान नेता राकेश सिंह का कहना है कि जिला प्रशासन की लापरवाही के चलते इस साल धान की खरीद में किसानों की उपेक्षा की गई है। अपर जिलाधिकारी शिवकुमार शर्मा कहते हैं कि शासन की गाइड लाइन के अनुसार सभी एजेंसियों को धान की खरीद करनी है, यदि इस संबंध में कोई शिकायत मिलेगी तो प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।