दोहरीघाट पंप कैनाल नहर से संबद्ध माइनरों में पानी न आने के चलते किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। माइनरें सूखी होने के कारण किसान न तो धान की नर्सरी डाल पा रहे हैं और न ही तैयार नर्सरी की रोपाई कर पा रहे हैं।
चौधरी चरण सिंह पंप कैनाल से चचाईपार, लधुवाई, दरौंधा माधोपुर, नत्थूपुर, बॉउडीह, मारूफपुर, सूरजपुर, कटघरा महलु, बहरामपुर, फतेहपुर माइनरों से सैकड़ों हेक्टेयर उपजाऊ जमीन की सिंचाई की जाती है। धान की नर्सरी डालने का समय चल रहा है, लेकिन नहर को मरम्मत के नाम पर बंद कर दिया गया है। जो किसान किसी तरह से धान की नर्सरी डाल चुके हैं उनकी रोपाई का समय हो गया है। यही नहीं कहीं-कहीं तो धान की रोपाई भी शुरू हो गई है लेकिन नहर की शाखाओं में पानी की जगह धूल उड़ रही है।
किसान श्रीराम सिंह, प्रभुनाथ मल्ल, रविंद्र नाथ मल्ल, विकास मल्ल का कहना था कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के आधार पर किसानों ने धान की नर्सरी डाल दिया है। रोपाई का समय शुरू हो गया है, लेकिन नहर में पानी नहीं आ रहा है। महंगे दामों पर डीजल से अपने खेतों में धान की फसल लगा रहे हैं। बरसात नहीं होने से किसानों को अपने खेतों में चार घंटे पानी चलाने की बजाय दस घंटे चलाने पड़ रहे हैं। जिसकी वजह से खेती की लागत बढ़ती जा है। नहर में कब पानी छोड़ा जाएगा पता नहीं चल पा रहा है।
नाराज किसानों ने सिंचाई विभाग को चेताया है कि यदि नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो वह आंदोलन को बाध्य होगें। इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र पासवान का कहना है कि नहर की मरम्मत की जा रही है। किसानों की मांग को देखते हुए नहर में पानी छोड़ा जा सकता है।