मऊ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रमोद कुमार सिंह ने मूल पता और तथ्यों को छुपाकर शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण कराने और ठेकेदारी का चरित्र प्रमाण पत्र बनवाने के मामले में पुलिस की ओर से विवेचना के बाद भेजे गए अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर दिया। साथ ही मामले में आरोपी ठेकेदार विद्यासगर सिंह के विरुद्व प्रथम दृष्टया जालसाजी के मामले में अपराध पाते हुए विचारण के लिए तलब करते हुए सम्मन भेजे जाने का आदेेश दिया। तथा मामले की सुनवाई के लिए 26 अगस्त 2017 की तिथि नियत किया।
मामला शहर कोतवाली क्षेत्र का है। मामले के अनुसार सरायलखंसी थाना क्षेत्र के बहरीपुर गांव निवासी संतोष कुमार सिंह की तहरीर पर 29 जनवरी 2015 को रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमेें बलिया जिले के साहपुर गांव निवासी ठेकेदार विद्यासागर सिंह पुत्र रमाशंकर सिंह को आरोपी बनाया गया। वादी का आरोप है कि आरोपी ने अपना मूल पता तथा अपने ऊपर दर्ज आपराधिक मुकदमों को छिपाते हुए फर्जी शपथ पत्र देकर उसमें शहर कोतवाली क्षेत्र के मुहल्ला निजामुद्दीनपुरा का पता देकर अपने शस्त्र का नवीनीकरण करा लिया तथा ठेकेदारी के लिए चरित्र प्रमाण पत्र भी बनवा लिया। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र दाखिल किया गया। लेकिन अपर पुलिस अधीक्षक ने आरोप पत्र को निरस्त कर पुन: विवेचना का आदेश दिया। जिसके बाद पुलिस ने मामले में अभियुक्त के विरुद्व अंतिम रिपोर्ट लगा दिया गया। कोर्ट से पुलिस द्वारा भेजे गए अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर अग्रिम विवेचना का आदेश दिया गया। बावजूद इसके पुलिस मामले में एक बार फिर अंतिम रिपोर्ट लगा दिया। वादी मुकदमा संतोष कुमार सिंह ने कोर्ट में पुलिस की ओर से भेजे गए अंतिम रिपोर्ट को निरस्त करते हुए आरोपी ठेकेदार विद्यासागर सिंह को धारा 190 ( एक ) बी सीआरपीसी के तहत तलब करने का अनुरोध किया। सीजेएम ने प्रार्थना पत्र पर वादी के अधिवक्ता अभय कुमार सिंह के तर्को को सुनने तथा पत्रावली का अवलोकन करने के बाद पुलिस की ओर से भेजे गए अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर दिया। साथ ही ठेकेदार विद्यासागर सिंह के विरुद्व धारा 419, 420, 467, 468 भादवि का प्रथम दृष्टया दंडनीय अपराध पाते हुए विचारण के लिए तलब करते हुए सम्मन भेजे जाने का आदेश दिया। तथा मामले की सुनवाई के लिए 26 अक्तूबर 2017 की तिथि नियत किया।