मऊ। जनपद में 25 पशु आश्रय केंद्र संचालित हैं। इनमें 1026 पशु संरिक्षत किए गए हैं। लेकिन इनका कई गुना निराश्रित पशु सड़कों पर घूम रहे हैं। किसानों के खेतों में लगी फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसान अपनी फसलों को इन निराश्रित पशुओं से बचाने के लिए रतजगा करने को विवश हैं। बेसहारा पशु सड़कों पर जहां तहां झुंड के झुंड बैठ जा रहे हैं। इससे यातायात तो बाधित होता ही है। सड़क हादसों में भी वृद्धि हो रही है। चार अक्तूबर को विश्व पशु दिवस है। इसकी जानकारी पशु पालन विभाग को नहीं है। इस उपलक्ष्य में पशुओं के कल्याण उपचार टीकाकरण अथवा अच्छे पशुपालकों को पुरस्कृत करने जैसे कोई आयोजन विभाग की ओर से नहीं किए गए हैं।
जिले में कुल पालतू गोवंश की संख्या एक लाख 73 हजार तीन सौ चार है। जबकि जनपद में कुल एक लाख 92 हजार 711 महिस वंश यानी भैंस हैं। कुल मिलाकर पालतू भैंस और गोवंश की संख्या की संख्या तीन लाख 66 हजार पंद्रह है। इनमें से पालतू जानवरों की संख्या लगभग एक लाख 26 हजार है। जनपद में कुल 31 पशु अस्पताल हैं। लेकिन इनमें से 21 पर ही पशु डाक्टर तैनात हैं। दस अस्पतालों में डाक्टरों के पद रिक्त हैं। जिले में पशुओं के लिए 35 कृत्रिम गर्भाधान केद्र हैं। इन केंद्रों पर उन्नत प्रजातियों के गाय और भैंस के लिए सीमन उपलब्ध रहते हैं। पशुपालकों को अपने अपने क्षेत्रों के केंद्रों से यह सुविधा लेने की छूट है।
विभाग का दावा सिर्फ दो हजार हैं निराश्रित पशु:
जनपद की सभी सड़कों पर सैकड़ों बेसहारा पशु घूमते हुए दिख जाते हैं। जनपद का कोई भी ऐसा गांव नहीं है जहां कई दर्जन बेसहारा पशु खेतों में झुंड झुंड घुसकर फसलों को नुकसान न पहुंचा देते हों। लेकिन विभाग का दावा है कि जिले में केवल दो हजार पशु ही निराश्रित हैं। जिले में रतनपुरा ब्लाक के कुड़वा में एक वृहद पशु आश्रय स्थल बन रहा है जबकि दूसरा परदहा ब्लाक के पिजड़ा गांव में वृहद पशु आश्रय स्थल बन रहा है। उम्मीद की जा रही है कि इन दोनों के बन जाने से काफी पशुओं को उनमें संरक्षित किया जा सकेगा।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर पशुओं के टीकाकरण सहित अन्य सुविधाएं पशुपालकों को उपलब्ध कराई जाती हैं। दस रिक्त पदों पर डाक्टरों की तैनाती के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।