बढुआगोदाम। परदहां ब्लाक क्षेत्र के कुशमौर गांव स्थित राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सुक्ष्म ब्यूरो सभागार में शनिवार को एक संगोष्ठी आयोजित हुई। जिसमें फंगल बायोलॉजी में वर्तमान दृष्टिकोण डिउटरोमैसिटिस विविधता विश्लेषण पहचान और वर्गीकरण के बारे में छात्रों को जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के तीसरे दिन अगरकर शोध संस्थान पुणे से आए वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डा. संजय कुमार सिंह ने बताया कि कवक भूमि में पड़े हुए सड़े-गले पदार्थ को अपघटित करके अन्य पदार्थ में परिवर्तित कर देते हैं। ये पदार्थ उर्वरक के समान कार्य करते हैं तथा भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते हैं। साथ ही इसका सबसे बड़ा फायदा खेतों में फसल के उत्पादन के लिए अच्छा होता है। कवक खाने में प्रयुक्त होते हैं। रोमेरिया, कलेवेसिया, एगैरिक्स, लिकोप्रगन को मशरूम के रूप में खाया जाता है मशरूम में बहुत अधिक प्रोटीन होता है मार्चला जिसे गुच्छी कहते हैं यह भी खाने में प्रयोग किया जाता है। प्रोटीन हमारे बॉडी के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्व जो हमारे के लिए काम करता है। कई कवक जैसे रोड़ोडेनेड्रोन नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं तथा भूमि की उर्वरता बढ़ाते हैं। अगर जमीन में नाइट्रोजन की मात्रा ज्यादा होती है तो फसल के लिए अच्छा होता है। इसीलिए गवार की बिजाई भूमि की उर्वरता बढ़ने के लिए की जाती है। डा. संजय कुमार गोस्वामी ने बताया कि अलग अलग आठ राज्यों से 20 छात्रों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिए हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में डा. आलोक कुमार श्रीवास्तव डा. अर्जुन सिंह मौजूद रहे।