मऊ। जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रानिक मीटर लगाने का कार्य अत्यंत धीमी गति से चल रहा है। पिछले एक साल से यह कार्य चल रहा है लेकिन अब तक केवल चार हजार विद्युत उपभोक्ताओं के घरों में ये मीटर लगाए जा सके हैं। सरकार ने अपने नए आदेश में बिना मीटर वाले उपभोक्ताओं की बिजली दरों में वृद्धि करके फिक्स रेट तय कर दिया है। इस नये आदेश उन विद्युत उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत अधिक बिल का भुगतान करना होगा।
जिले के तीन विद्युत वितरण खंडों के अंतर्गत ग्रामीण इलाकों में कुल एक लाख 86 हजार विद्युत उपभोक्ता हैं। इनमें नीजी नलकूप , लाइट कनेक्शन, कृषि नलकूप और कामर्शियल उपभोक्ता भी शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले पंखा बत्ती यानी लाइट कनेक्शन और नीजी नलकूपों के लिए पासबुक आधारित फिक्स रेट तय कर रखा था। लेकिन अब सरकार ने सभी विद्युत उपभोक्ताओं के घरों पर मीटर लगाने का फरमान जारी कर दिया है। इसके लिए प्रदेश मुख्यालय से कोलकाता की एक कंपनी को इलेक्ट्रानिक मीटर लगाने का दायित्व सौंपा गया। लेकिन पहली बार में इस कंपनी को 12 हजार मीटर खरीदने का आर्डर दिया गया। इस मीटर को लगाने का काम काफी धीमी गति से शुरु किया गया। नतीजा यह रहा कि विद़्युत वितरण खंड तृतीय में केवल सात सौ मीटर लगाए गए हैं जबकि प्रथम और द्वितीय खंड तीन हजार तीन सौ मीटर लगाए जा सके हैं।
इधर सरकार ने बिजली की दरों में वृद्धि कर दी है जिन उपभोक्ताओं के घरों मेें मीटर लगा दिए गए हैं उन्हें मीटर रीडिंग के हिसाब से बिल चुकाना होगा और जिनके घरों में मीटर नहीं लग सके हैं उन्हें फिक्स कर दी गई दरों से बिल चुकाना होगा जो मीटर की अपेक्षा अधिक होगा। केवल बत्ती पंखा वाले अनमीटर्स लाइट कनेक्शन धारी उपभोक्ताओं को अब बढ़ी दरों के अनुसार कम से कम साढ़े चार सौ रुपये बिजली बिल देना होगा। इस बाबत अधीक्षण अभियंता एसएस प्रसाद का कहना है कि प्रदेश स्तर पर ही मीटर लगाने के लिए एक कंपनी को ठेका दिया गया था। प्रथम चरण में 12 हजार मीटर के आर्डर दिए गए थे। शासन के नये आदेश के अनुसार जल्दी ही शेष उपभोक्ताओं के घरों पर इलेक्ट्रानिक मीटर लगाए जाएंगे।